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सौरमंडल में आज रात देखने को मिलेगा अद्भुत नजारा, राजस्थान में 3 मई को तड़के 5 बजे आएगा नजर

Venus and Moon Conjunction - सौरमंडल के साथ ही उसकी सत्ता में मई अद्भुत संयोग ला रही है। वैशाख कृष्ण त्रयोदशी पर 2 मई को सौरमंडल में अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।

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Venus and Moon Conjunction

जयपुर। venus and moon Conjunction - सौरमंडल के साथ ही उसकी सत्ता में मई अद्भुत संयोग ला रही है। वैशाख कृष्ण त्रयोदशी पर 2 मई को सौरमंडल में अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। इस दिन रात 8 बजकर 15 मिनट पर सौम्यता के प्रतिक चन्द्रमा व सौन्दर्य के प्रतिक शुक्र ग्रह का मिलन होगा। हालांकि राजस्थान में यह नजारा शुक्रवार को तड़के 5 बजे नजर आएगा, जो 45 मिनट तक दिखाई देगा। वहीं इसके अगले दिन आकाशीय संसद के राजा शनि देव के राज में शनिवार को नवसंवत्सर की पहली शनि अमावस्या आएगी। इस दिन सूर्य, चन्द्रमा व बुध ग्रह तीनों एक साथ मेष राशि में आकर त्रिग्रही योग बनाएंगे।

सभी जातकों के लिए शुभ दायक होगा-
सौरमंडल में पूर्व क्षितिज पर 2 मई को रात 8.15 बजे चन्द्रमा व शुक्र ग्रह का मिलन होगा, जो अगले दिन 3 मई को सुबह 5.45 बजे तक रहेगा। राजस्थान सहित पूरे भारत में यह अद्भुत नजारा 3 मई को तड़के 5 बजे से नजर आएगा। एेसे में यहां सिर्फ 45 मिनट ही लोगों को यह नजारा देखने को मिलेगा। ज्योतिषाचार्य दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि शुक्र सौन्दर्य का प्रतीक माना गया है और चन्द्रमा सौम्यता का प्रतीक है, एेसे में यह मिलन सभी जातकों के लिए शुभ दायक होगा, वहीं कर्क, कन्या, वृश्चिक व मीन राशि के जातकों के लिए विशेष फलदायक होगा।

अश्विनी नक्षत्र व आयुष्मान योग में शनि अमावस्या-
नवसंवत्सर की पहली शनि अमावस्या 4 मई को अश्विनी नक्षत्र व आयुष्मान योग में आ रही है। इस दिन सूर्य, चन्द्रमा व बुध ग्रह का एकसाथ मेष राशि में आने से त्रिग्रही योग भी बनेगा। अश्विनी नक्षत्र एक दिन पहले शुक्रवार दोपहर 2 बजकर 40 मिनट पर शुरू हो जाएगा, जो शनिवार दोपहर 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। वहीं आयुष्मान योग शनिवार तड़के 4 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा, जो दूसरे दिन रविवार तड़के 4 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य दामोदर प्रसाद ने बताया कि सूर्य अभी मेष राशि में चल रहा है, वहीं चन्द्रमा 3 मई को दोपहर 2.40 बजे मेष राशि में आ जाएगा, इसके बाद इसी दिन शाम 4.59 बजे बुध भी मेष राशि में आ जाएंगे।

2019 में 3 शनिचरी अमावस्या के संयोग-
ज्योतिषाचार्य चन्द्रशेखर शर्मा ने बताया कि अमावस्या तिथि का शास्त्रों में बड़ा महत्व है और यदि अमावस्या सोमवार, मंगलवार या शनिवार को आती है तो इसे विशेष उत्सव माना जाता है। शनिचरी अमावस्या पर विशेष दान-पुण्य का विधान है। 2019 में 3 शनिचरी अमावस्या के विशेष संयोग बन रहे हैं। इसमें वर्ष 2019 की पहली शनिचरी अमावस्या जनवरी में आई, वहीं दूसरी 4 मई को शनिवार को आएगी। इस साल की अंतिम शनि अमावस्या 28 सितंबर को आएगी। वैशाख मास की अमावस्या तिथि शनिवार के दिन आए तो इसका महत्व अधिक बढ़ जाता है। इस दिन शनि देव की आराधना, पितृ शांति के लिए अर्चना विशेष फलदायक होगी।

फोटो- प्रतीकात्मक तस्वीर


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