
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू रविवार को निवाई के वनस्थली विद्यापीठ में 34 वें दीक्षान्त समारोह को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। नायडू ने राजनीति में सभी स्तर पर महिला आरक्षण देने की वकालत करते हुए कहा है कि सभी को एकसाथ मिलकर इस मुद्दे पर सोचना होगा। उन्होंने कहा कि पहले वह भाजपा से जुड़े रहे लेकिन अब संवैधानिक पद पर हैं। इसकी मर्यादा है। ऐसे में वह सबसे सिर्फ आग्रह कर सकते हैं।

इस मौके पर 99 छात्राओं को गोल्ड मेडल व 282 दीक्षाॢथयों को उपाधियां प्रदान की गईं।

इससे पहले उपराष्ट्रपति सेना के हेलिकॉप्टर से रविवार सुबह करीब 10.15 बजे जयपुर से वनस्थली पहुंचे। उद्योग मंत्री राजपालसिंह शेखावत भी उनके साथ थे। नायडू करीब 3 घंटे तक विद्यापीठ में रहे।

देश की प्रतिभाएं विदेश जाएं, पढ़े-सीखें लेकिन वापस देश में आकर यहां के लिए काम करें। गांवों का विकास करें। यहां भी उन्न्ति के अच्छे अवसर हैं।

वनस्थली विद्यापीठ की पंचमुखी शिक्षा की सराहना करते हुए नायडू ने कहा कि वह अपनी पुत्री को यहां के सिस्टम का अध्ययन करने भेजेंगे। देश भी इस पद्धति को अपनाए।

पंचायत व्यवस्था में महिलाओं को आरक्षण देने की आलोचना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां के लिए कहा जाता है कि महिला सरपंच की बजाय उसका पति फैसले लेता है, सारे काम करता है। नायडू ने कहा, मेरा मत है कि महिला को एक बार काम करने का मौका तो दीजिए, फिर देखिए पति की क्या गति होती है।

महात्मा गांधी के गांवों की तरफ लौटने के नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विकास नहीं होने से गांवों से पलायन हो रहा है। यह अच्छी स्थिति नहीं है।

