कई बार अनजाने में 10–20 रुपये का लेन-देन भी ऐसी श्रृंखला का हिस्सा बन सकता है, जो आगे चलकर किसी बड़ी शिकायत से जुड़ जाए। यद्यपि यह दुर्लभ स्थिति होती है, फिर भी वित्तीय अनुशासन संभावित असुविधा को कम कर सकता है। विशाल कटारिया की मानें तो यदि खाता अस्थायी रूप से प्रतिबंधित हो जाए, तो नागरिक को संबंधित बैंक शाखा से लिखित जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। यह जानना आवश्यक है कि रोक किस प्राधिकरण या शिकायत के आधार पर लगाई गई है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित साइबर प्रकोष्ठ अथवा विधिक सलाह का सहारा लिया जा सकता है। प्रक्रिया में समय लग सकता है, अतः वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था उपयोगी सिद्ध हो सकती है।