
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी
जयपुर। पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि स्त्री का सबसे बड़ा गुण दूसरों का लालन-पालन और चिंता करना है। इस प्रक्रिया में वह स्वयं को पीछे रख देती है। यही उसकी दिव्यता है, जिसे शब्दों में बांधना संभव नहीं। वे जवाहर कला केंद्र में सेवायाम संस्था की ओर से मां पन्नाधाय नारी शक्ति महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को उनकी पुस्तक 'स्त्री की दिव्यता' के विषय विवेचन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि माताओं को अपने बच्चों को सही दिशा देकर उन्हें सच्चा इंसान बनाना होगा, क्योंकि संस्कारों का बीजारोपण वही करती हैं।
कोठारी ने कहा कि समाज युगों से चलता आ रहा है, लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी महिला सशक्तीकरण का सपना सच होने पर सवाल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बेटियों में प्रारंभ से ही मातृत्व का भाव मौजूद होता है, जबकि बेटों में यह भाव धीरे-धीरे विकसित होता है। सृष्टि के इस अंतर को समझना आवश्यक है। समाज में लड़कों की कमियां अक्सर स्वीकार कर ली जाती हैं, लेकिन लड़कियों के मामले में अधिक सतर्कता बरती जाती है, क्योंकि परिवार को यह चिंता रहती है कि लड़की को दूसरे घर जाना है। उन्होंने कहा कि पति और पत्नी मिलकर एक इकाई बनाते हैं, तभी परिवार और समाज का संतुलन कायम रहता है।
कोठारी ने कहा कि शरीर में स्त्री और पुरुष दोनों तत्व मौजूद हैं, लेकिन केवल आधा-आधा कह देने से बात पूरी नहीं होती। एक पक्ष सोम है तो दूसरा अग्नि। शिक्षा के पाठ्यक्रम में इन पहलुओं का उल्लेख नहीं है। किताबों से भावनात्मकता और संवेदनशीलता का पक्ष लगभग गायब हो गया है, जबकि मां का पहला गुण संवेदनशीलता ही है। वर्तमान पाठ्यक्रम ने मां के स्वरूप को बदलने का काम किया है।
कोठारी ने कहा कि वर्तमान में हम प्राणविहीन संस्कृति की नकल कर रहे हैं। लड़कियों में पुरुष प्रधानता का प्रभाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाश्चात्य संस्कृति में प्राण और आत्मा की अवधारणा नहीं है और वहां कॉन्ट्रेक्ट शादियां प्रचलित हो रही हैं। इसके विपरीत भारतीय परंपरा में विवाह को जीवन भर के संबंध के रूप में देखा जाता है। हमारे यहां कहावत है ‘खड़ी आई हूं, आड़ी होकर जाऊंगी’, जिसका आशय यह है कि स्त्री ससुराल सम्मान के साथ आती है और जीवन के अंतिम क्षण तक उसी घर का हिस्सा बनी रहती है।
इससे पहले निवर्तमान महापौर सौम्या गुर्जर ने 'स्त्री की दिव्यता' और 'स्त्री देह से आगे' पुस्तकों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें भारतीय संस्कृति, ज्ञान व परंपरा देखने को मिलती है। गुलाब कोठारी महिला शक्ति के विचार को लगातार आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं और भारतीय सांस्कृतिक आंदोलन के प्रणेता हैं।
Updated on:
09 Mar 2026 07:39 pm
Published on:
09 Mar 2026 07:33 pm
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