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जलदाय विभाग की तरह जल संसाधन विभाग के टेंडरों में भी 1 हजार करोड़ का गडबड़झाला

-प्रमुख सचिव ने टेंडर प्रक्रिया में साइट विजिट की शर्त को किया निरस्त - इंजीनियरों ने पुरानी शर्त पर प्राप्त कर लिए टेंडर

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जयपुर.

जल संसाधन विभाग के पांच हजार करोड़ के टेंडर में पूलिंग और गड़बड़ी रोकने के लिए विभाग के प्रमुख सचिव शिखर अग्रवाल ने 13 दिसंबर को एक आदेश जारी कर टेंडरों में साइट विजिट की बाध्यता वाली शर्त को निरस्त कर दिया। लेकिन विभाग के इंजीनियर प्रमुख सचिव के आदेश दरकिनार करते हुए साइट विजिट की शर्त के साथ ही टेंडर जारी कर रहे हैं। इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से टेंडरों की पूलिंग हो रही हैं। दरें भी 10 से 15 प्रतिशत तक ज्यादा आई हैं।
विभाग के इंजीनियरों के अनुसार पूलिंग के इस खेल में एक हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। जल जीवन मिशन के टेंडर की शर्तें बदल कर 10 हजार करोड़ का गडबड़झाला सामने आया है। वित्त विभाग ने भी जल जीवन मिशन की टेंडर प्रक्रिया में आरटीपीपी एक्ट का सीधे तौर पर उल्लंघन माना है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि टेंडर निरस्त होने चाहिए जिससे राज्य सरकार एक हजार करोड़ रुपए के नुकसान से बच सके। जल संसाधन विभाग में साइट विजिट की मनमर्जी की शर्त एक वर्ष पहले जोडी गई थी। इंजीनियरों ने चहेती फर्मों को टेंडर दिलाने में जम कर मनमर्जी की और आरटीपीपी एक्ट को ताक पर रख दिया।

टेंडर में साइट विजिट के प्रावधान वाले आदेश को निरस्त कर दिया है। पूरी प्रक्रिया पर मेरी निगाह है। परीक्षण के दौरान पूलिंग के कारण दरें ज्यादा आती हैं तो टेंडर एप्रूव नहीं होगा। अगर साइट विजिट की शिकायत आती है तो संबंधित इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई होगी।
शिखर अग्रवाल, प्रमुख सचिव, जल संसाधन विभाग