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क्या कहता है उत्तरी राजस्थान का गणित

उत्तरी राजस्थान के 6 जिलों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के ही सामने बगावत और भितरघात से निपटना बड़ी चुनौती है। पहले बात सरहदी इलाके गंगानगर की। पिछले चुनाव में दोनों जिलों की 11 में से 9 सीटें हथियाने वाली भाजपा को इस बार अपनी स्थिति को बनाए रखने के लिए खासा जोर लगाना पड़ रहा है। टिकटों की अदला-बदली ने उसके कई नेताओं को उससे दूर कर दिया है। गंगानगर सीट पर 1993 में भाजपा के दिग्गज भैरोंसिंह शेखावत को हराने वाले राधेश्याम गंगानगर इस बार पार्टी का साथ छोड़कर निर्दलीय मैदान में डटे हैं। इसी सीट पर कांग्रेस के बागी राजकुमार गौड़ हाथ को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। रायसिंहनगर में सोहन नायक, करणपुर में पृथ्वीपाल सिंह संधु, सादुलशहर में ओमविश्नोई और अनूपगढ़ में शिमला नायक भी कांग्रेस की चुनावी नैया को हिचकोले खिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। हनुमानगढ़ में बगावत नहीं है, पर वंचितों की 'कारसेवा से अधिकृत प्रत्याशी सचेत जरूर है .

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Rajasthan Election 2018 : फिर पड़ न जाए नोटा का ‘सोटा’

उत्तरी राजस्थान के 6 जिलों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के ही सामने बगावत और भितरघात से निपटना बड़ी चुनौती है। पहले बात सरहदी इलाके गंगानगर की। पिछले चुनाव में दोनों जिलों की 11 में से 9 सीटें हथियाने वाली भाजपा को इस बार अपनी स्थिति को बनाए रखने के लिए खासा जोर लगाना पड़ रहा है। टिकटों की अदला-बदली ने उसके कई नेताओं को उससे दूर कर दिया है। गंगानगर सीट पर 1993 में भाजपा के दिग्गज भैरोंसिंह शेखावत को हराने वाले राधेश्याम गंगानगर इस बार पार्टी का साथ छोड़कर निर्दलीय मैदान में डटे हैं। इसी सीट पर कांग्रेस के बागी राजकुमार गौड़ हाथ को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। रायसिंहनगर में सोहन नायक, करणपुर में पृथ्वीपाल सिंह संधु, सादुलशहर में ओमविश्नोई और अनूपगढ़ में शिमला नायक भी कांग्रेस की चुनावी नैया को हिचकोले खिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। हनुमानगढ़ में बगावत नहीं है, पर वंचितों की 'कारसेवा से अधिकृत प्रत्याशी सचेत जरूर है .