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Explainer : क्या है इजरायल का ‘आयरन डोम’ सिस्टम, जो दुश्मन के हमलों से रखता है महफूज

जब कोई रॉकेट इजरायल की तरफ आता है तो डिटेक्शन और ट्रैकिंग राडार इसका पता लगाकर हथियार नियंत्रण प्रणाली को भेजता है, फिर लॉन्चर तत्काल हवा में इस खतरे को नष्ट कर देता है।

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क्या है इजरायल का ‘आयरन डोम’ सिस्टम, जो दुश्मन के हमलों से रखता है महफूज

हमास के रॉकेटों को नष्ट करता आयरन डोम

जयपुर. आतंकी समूह हमास के ताबड़तोड़ हमले के बाद इजरायल का आयरन डोम फिर चर्चा में है। इसे मजबूत और अभेद्य सुरक्षा कवच माना जाता है। यहां जानते हैं इससे जुड़ी जानकारी।

क्या है आयरन डोम
यह एक एयर डिफेंस सिस्टम है, जो टारगेट को भांपकर सेकंडों में इसे ध्वस्त कर देता है। इसे आयरन डोम एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम कहते हैं। इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात किया गया है। यह दिन-रात और हर मौसम में सक्रिय रहता है।

कैसे काम करता है
इस टेक्नोलॉजी के तीन मुख्य चरण हैं। पहला डिटेक्शन-ट्रैकिंग राडार, दूसरा युद्ध प्रबंधन, तीसरा हथियार नियंत्रण और 20 तामीर मिसाइल से युक्त लॉन्चर। जब कोई रॉकेट इजरायल की तरफ आता है तो डिटेक्शन और ट्रैकिंग राडार इसका पता लगाकर हथियार नियंत्रण प्रणाली को भेजता है, फिर लॉन्चर तत्काल हवा में इस खतरे को नष्ट कर देता है। इजरायल के पास लॉन्चर भी दो तरह के हैं, एक स्टेशनरी और दूसरा मोबाइल। स्टेशनरी एक जगह पर फिक्स्ड रहते हैं, जबकि मोबाइल कहीं भी ले जाएं जा सकते हैं।

कितनी दूरी कवर करता है
यह सिस्टम इजरायल की सीमा के लगभग 70 किमी दायरे को कवर करता है। इस दायरे में जब कोई खतरा आता है, तो प्रणाली स्वत: एक्टिवेट हो जाती है और आने वाले खतरों को हवा में ही नेस्तनाबूद कर देती है। यही वजह है पड़ोसी देशों के खतरे से इजरायल सुरक्षित माना जाता है।

इसकी सक्सेस रेट क्या है?
आयरन डोम बनाने वाली कंपनी रफाल इसकी सक्सेस रेट 90% होने का दावा करती है। हालांकि एक्सपर्ट 70 से 80% ही मानते हैं, क्योंकि इसमें पूरी तरह मिसाइल प्रूफ नहीं होने जैसी कुछ खामियां हैं। अब तक यह सिस्टम 2 हजार से ज्यादा हमलों को नाकाम कर चुका है।

कब और क्यों बना
वर्ष 2006 के लेबनान संघर्ष में हिज्बुल्लाह समूह ने इजरायल के उत्तरी क्षेत्र में हजारों रॉकेट दागे थे। इसमें सैकड़ों जानें गई थी। इसके बाद इजरायल ने सरकारी डिफेंस कंपनी रफाल ने ‘आयरन डोम’ के नाम से वायु रक्षा प्रणाली को विकसित किया। रफाल के इस प्रोजेक्ट में अमरीका ने भी 20 करोड़ डॉलर की मदद दी थी। 2011 में यह प्रणाली शुरू हुई।

इस बार क्यों फेल हुआ?
हमास कई वर्षों से इस सिस्टम का तोड़ ढूंढ रहा है। इस बार वह काफी हद तक कामयाब भी हो गया। हमास ने इस बार ‘सॉल्व रॉकेट’ का सहारा लिया, जो कम समय में कई लॉन्चर से फायर करता है। इस बार हमास ने एक साथ 5 हजार रॉकेट दागे, जिससे आयरन डोम प्रणाली सभी लक्ष्यों को भेद नहीं पाई, कुछ रॉकेट ही नष्ट हुए।


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