हिन्दू धर्म में मान्यता है कि भगवान गणेशजी की सवारी मूसकराज है और इन्हें परेशान करने वालों पर गणेशजी की कृपा नहीं रहती। इसी मान्यता के कारण ही अधिकतर लोग चूहों को नुकसान पहुंचाने की बजाय पकड़कर दूर-दराज छोड़ देते हैं।
रविवार को ऐसा ही एक दृश्य रातानाडा गणेश मंदिर पहाड़ी पर भी देखने को मिला। सालावास गांव निवासी एक युवक व युवती अपने घर से सफेद चूहों को कार्टन में लेकर आए और गणेश मंदिर के सामने छोड़ गए। पत्रिका टीम ने इस दृश्य को कवर किया।

वे नन्हें-नन्हें चूहों को कार्टन में पैक कर एक कट्टे में डालकर लाए थे। उनसे पूछा इसमें क्या है तो बोले, इसमें सफेद चूहे हैं। जो घर में उनके मामा ने पाल रखे थे। इनकी संख्या बढ़ गई तो परेशान करने लगे। इसलिए इन्हें गणेशजी की शरण में छोडऩे ले आए। कार्टन में चूहों के लिए बाजरी के दाणे भी एक थैली में डाल रखे थे।

दोनों ने बताया कि उनका मन इन्हें छोडऩे का नहीं है, पर क्या करें। उदास मन से दोनों ने कर्टन को खोला और उन्हें बाहर छोड़ दिया। पाले हुए चूहे कर्टन से बाहर निकलने से कतरा रहे थे। फिर धीरे-धीरे बाहर आ गए और इधर-उधर चल गए। युवक-युवती उदास मन के साथ वहां से रवाना हो गए।