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वो कौन है…वो कौन है…

एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी को भाजपा के साथ मिलकर पांच साल तक स्थिर सरकार देने का वादा करने वाले अजित पवार का मन आखिर कैसे बदल गया। क्या उनके उपर पारिवारिक दबाव था, या परिवारिक मोह अथवा अन्य कोई कारण।

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जयपुर
महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम अजित पवार Ajit Pawarऔर उसके बाद सीएम देवेन्द्र फडनवीस Devendra Fadnavis के इस्तीफे के साथ ही शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार के गठन की तैयारी शुरू हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह है कि एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी को भाजपा के साथ मिलकर पांच साल तक स्थिर सरकार देने का वादा करने वाले अजित पवार का मन आखिर कैसे बदल गया। क्या उनके उपर पारिवारिक दबाव था, या परिवारिक मोह अथवा अन्य कोई कारण। सवाल तो यह भी उठता है कि अजित के लिए परिवार ही ज्यादा महत्वपूर्ण था तो उन्होंने डिप्टी सीएम पद की शपथ क्यों ली, क्यों गए फडनवीस के पास। ऐसे सभी सवालों के सही सही जवाब तो अजित ही दे सकते हैं। लेकिन उन्हें एनसीपी से भाजपा के घर में लाने का रास्ता किसने दिखाया था।
अजित पवार के भाजपा के साथ जाने और डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने की खबर के बाद से ही एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के नेता भी स्तब्ध और परेशान हो रहे थे। तीनों दलों के नेताओं के जेहन में एक ही यक्ष प्रश्न कौंध रहा था कि अजित को मनाकर वापस कैसे लाया जाए। उन्हें मनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए। इस प्रश्न का सही जवाब केवल शरद पवार के पास था, उन्होंने इसके लिए उचित नेता का चुनाव करके उन्हें जिम्मेदारी सौंपी और वह इसमें पूरी तरह सफल भी हुए। माना जा रहा है कि जिसने अजित पंवार को वापस एनसीपी खेमें में लाने में अहम भूमिका निभाई वह भाजपा के एक बड़े नेता के परिजन है। इनका नाम है धनंजय मुंडे हैं। सूत्रों का कहना है कि ये ही वो शख्स है जिन्होंने अजित पवार के डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने से पहले उनके लिए एनसीपी विधायकों को एकजुट किया था। ये बीजेपी के कद्दावार दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे है। इन्हीं के एनसीपी खेमे में चले जाने के कारण फडनवीस सरकार गिर गई। चर्चा है कि है कि धनंजय ने बीजेपी और अजित पवार को साथ लाने में सबसे अहम रोल निभाया था। बताया जा रहा है कि शुक्रवार शाम को देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद उन्होंने ही सरकार बनाने का प्लान तैयार किया और अजित पवार का साथ दिया। इसके बाद शरद पंवार ने जब डैमेज कंट्रोल किया तो धनंजय मुंडे एक बार फिर शरद पवार के खेमे में वापस चले गए। सुप्रीम कोर्ट के बुधवार शाम तक बहुमत परीक्षण के आदेश के बाद अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दे दिया, उसके ठीक बाद में सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी इस्तीफा दे दिया


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