
विभागीय अधिकारियों के पास अन्य बच्चों से संबंधित प्रमाण-पत्र व अन्य दस्तावेज नहीं है। एेसे में अब सवाल यह है कि पालनहार योजना में पिछले दस साल से दी जा रही राशि किसके खातों में जमा हो रही थी? गड़बड़झाला इस स्तर पर हुआ है कि महकमे को 6 माह की भाग-दौड़ के बाद भी दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं।
वर्ष 2004 से यह योजना लागू है। इसमें अनाथ, एचआईवी पीडि़त, नाता प्रथा से प्रताडि़त, कुष्ठ रोगी, आजीवन सजा काट रहे परिजनों के बच्चों को शामिल किया गया है। इन बच्चों को पालने वाले यानि पालनहार को 5 वर्ष तक के बच्चे के लिए 500 रुपए मासिक और 6 से 18 वर्ष के बच्चे के लिए 1000 रुपए मासिक देने का प्रावधान है। जिले के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने वर्ष 2013-14 में 1884 परिवारों के 2337 बच्चों को 1 करोड़ 94 लाख, 2014-15 में 2340 परिवारों के 3205 बच्चों को 2 करोड़ 8 लाख, वर्ष 2015-16 में 2275 परिवारों के 3865 बच्चों को 2 करोड़ 70 लाख रुपए का भुगतान किया है।
एेसे खुली पोल
छह माह पूर्व राज्य सरकार की ओर से पालनहार योजना को ऑनलाइन करने के साथ ही जिन बच्चों को लाभान्वित किया है, उनकी आंगनबाड़ी या स्कूल में दाखिले का प्रमाण, बैंक डायरी और उनके माता या पिता की मृत्यु का प्रमाण पत्र चाहा है। इस जानकारी ने विभागीय पोल को उजागर कर दिया है। विभाग 6 माह में महज 629 परिवारों को ही तलाश पाया है। इसके अलावा उन्हें प्रमाण नहीं मिल रहे हैं।
अब कर रहे हैं तैयार
अब तक विभाग जिन लोगों को यह राशि दे रहा था, उसको लेकर विभाग के पास प्रमाण ही नहीं है। उसके अलावा छह माह की रात-दिन की मेहनत के बावजूद यह पता नहीं चल पा रहा है कि ये बच्चे कौन है और कहां पर है। एेसे में विभाग की ओर से जारी की गई राशि को लेकर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
सवाल जो मांगते हैं जवाब
- 629 परिवार ही 6 माह में सत्यापित हुए हैं तो शेष परिवार कहां है?
- विभाग के पास खाता नंबर है तो फिर क्यों नहीं मिल रहे हैं शेष परिवार?
- 1500 से अधिक परिवार हर माह राशि उठाते रहे हैं तो अब क्यों नहीं लग रहा पता?
- यदि यह परिवार है ही नहीं तो विभाग किसको देता रहा इनके नाम पर राशि?
- आंगनबाड़ी और स्कूलों में दाखिल हैं तो फिर संस्था प्रधान से क्यों नहीं मिल रहे नाम पते?
- विभागीय अधिकारी इस मामले में बयान देने से बचने का क्यों कर रहे हैं प्रयास?
...और जिम्मेदारों के ये जवाब
मैं कुछ नहीं कहूंगा
मैं इस मामले में कुछ नहीं कहूंगा। इसको पीओ देखते हैं। उनसे ही बात कर लीजिए।
संजय सांवलानी, सहायक निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
कारण पता नहीं
अभी छह महीने में 629 ही सत्यापित हुए हैं। शेष का सत्यापन नहीं हुआ है। कारण का पता नहीं है।
कृष्णकुमार यादव, प्रभारी, पालनहार योजना, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
करवा रहे जांच
इस मामले की जांच करवाई जा रही है। प्रकरण निदेशालय की जानकारी में भी लाया गया है।
- सुधीरकुमार शर्मा, जिला कलक्टर
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