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वसुंधरा राज में किसकी तंगी पड़ रही जनता पर भारी, जानिए

— जयपुर की सड़कों पर दौड़ेगी 249 कंडम हो चुकी बसें— नियमों के मुताबिक सितम्बर—अक्टूबर 2018 तक रिटायर होनी है 249 लो फ्लोर बसें— जेसीटीएसएल ने निकाला तोड़, ठेकेदार फर्म से किया 2021 तक का करार
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जयपुर

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Pawan kumar

Jul 17, 2018

vasundhra

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जयपुर। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड की आर्थिक तंगी शहर के लोगों पर भारी पड़ने वाली है। सितम्बर—अक्टूबर 2018 तक जेसीटीएसएल की ढाई सौ लो फ्लोर बसें कंडम घोषित हो जाएंगी। राजस्थान राज्य पथ परिवहन के नियमों के मुताबिक इन बसों को सड़क से हटना चाहिए, लेकिन ऐसा होगा नहीं। क्योंकि जेसीटीएसएल के पास नई बसें खरीदने का बजट नहीं है। ऐसे में कंडम हो चुकी बसें धुंआ उगलते हुए जयपुर की सड़कों पर दौड़ती रहेंगी। ऐसा करने के लिए जेसीटीएसएल प्रबंधन ने गली निकाल ली है।

यूं निकाला कंडम बसें चलाने का तोड़
जेसीटीएल प्रबंधन को 249 बसों को सितम्बर—अक्टूबर 2018 तक सड़क से हटाना है। जबकि 115 बसें 2019 में सड़कों से हटनी है। इन बसों को इसलिए सड़क से हटाना है क्योंकि ये बसें 10 साल की मियाद पूरी कर चुकी हैं। राजस्थान राज्य पथ परिवहन के नियमों के अनुसार 10 साल की अवधि पूरी होने या 8 लाख किलोमीटर तक चलने के बाद बसों को कंडम मानते हुए सड़क से हटाना होता है। लेकिन आर्थिक संकट झेल रही जेसीटीएसएल प्रबंधन ने कंडम हो चुकी 364 बसों को 2021 तक चलाने का रास्ता निकाल लिया है। जेसीटीएसएल ने गुजरात की फर्म मातेश्वरी ट्रांसपोर्ट और हरीश ट्रांसपोर्ट के साथ कॉन्ट्रेक्ट कर 2020 तक बसें चलाने का ठेका दे दिया। मातेश्वरी ट्रांसपोर्ट के पास विद्याधर नगर डिपो की 168 और हरीश ट्रांसपोर्ट के पास सांगानेर डिपो की 196 लो फ्लोर बसों के संचालन का जिम्मा है। इन फम्र्स को 2020 के बाद एक साल और यानी 2021 तक इन बसों का संचालन करना है। क्योंकि इन फर्मों को बस संचालन का ठेका अप्रैल 2015 में देना था, जो अप्रैल 2016 में दिया गया। इसकी भरपाई के लिए कॉन्ट्रेक्ट 2021 तक चलेगा।

ज्यादा ईंधन खपत, ज्यादा प्रदूषण, हादसों का खतरा
खटारा लो फ्लोर बसें पुरानी होने के कारण ज्यादा ईंधन खपत कर रही हैं। इसके कारण इन बसों से प्रदूषण भी ज्यादा फैल रहा है। इससे शहर में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है। यही नहीं बसें पुरानी होने के कारण बीच रास्ते में ही थम जाती हैं, जिसके कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खटारा हो चुकी बसों का स्टेयरिंग फेल होने और ब्रेक फेल हो जाने के कारण आए दिन हादसे होते रहते हैं। अब तक लो फ्लोर बसों की चपेट में आकर कई लोग जान गंवा चुके हैं।

स्मार्ट सिटी के लिए है स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट
स्मार्ट ट्रांसपोर्ट का मतलब ये है कि शहर की सड़कों पर लैस पॉल्यूशन, लैस फ्यूल कंजप्शन और ईको फ्रेंडली वाहन दौड़ेंगे। इलेक्ट्रिक व्हीकल इसका खास कंपोनेंट हैं। स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट परियोजना में हाईटेक बसें, कैब, आॅटो और मेट्रो की परिकल्पना की गई है। जेसीटीएसएल ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जो 100 नई लो फ्लोर बसें खरीदी हैं, सिर्फ उन्हीं में स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाली खासियतें हैं। मौजूदा वक्त में शहर की सड़कों पर दौड़ रही 300 से ज्यादा खटारा लो फ्लोर बसें बहुत पुरानी और खस्ताहाल

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