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Research : महिलाओं में क्यों होता है पुरुषों से ज्यादा हार्ट अटैक का जोखिम

नया शोध: तत्काल डॉक्टरों से संपर्क कर टाला जा सकता है खतरा महिला और पुरुषों में अलग होते हैं हृदयाघात के लक्षण

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Research : महिलाओं में क्यों होता है पुरुषों से ज्यादा हार्ट अटैक का जोखिम

Research : महिलाओं में क्यों होता है पुरुषों से ज्यादा हार्ट अटैक का जोखिम

न्यूयॉर्क. महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के संकेत अलग-अलग होते हैं। ये संकेत मिलते ही तत्काल डॉक्टरों से संपर्क कर खतरे को टाला जा सकता है। अमरीका के स्मिड्ट हार्ट इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के शोध में यह बात कही गई। हेल्थ जर्नल लैंसेट में प्रकाशित शोध के मुताबिक 50 फीसदी लोगों में हार्ट अटैक से 24 घंटे पहले संकेत मिलने लगते हैं। डॉ. सुमीत चुघ के नेतृत्व में हुए शोध में पाया गया कि हार्ट अटैक से पहले महिलाओं को जहां सांस लेने में तकलीफ होती है, वहीं पुरुषों को सीने में दर्द महसूस होता है। धडकऩ बढऩे और फ्लू जैसे लक्षण दोनों महसूस करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों को अस्पताल से बाहर हार्ट अटैक आता है, उनमें से 90 फीसदी की जान चली जाती है। विशेषज्ञों ने पाया कि कोरोना के बाद दिल से जुड़ी बीमारियां गंभीर हुई हैं। खासकर महिलाओं में शारीरिक गतिविधियों में कमी, खानपान में गड़बड़ी और स्ट्रेस बढऩे से भी दिल की बीमारियां ज्यादा हो रही हैं।

महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा खतरा
शोध के मुताबिक पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में हार्ट अटैक ज्यादा खतरनाक हो सकता है। समय पर इलाज नहीं मिलना खतरे को और बढ़ा देता है। महिलाओं में पहले हार्ट अटैक के पांच साल के अंदर मौत, हार्ट फेलियर या स्ट्रोक का खतरा 47 फीसदी, जबकि पुरुषों में करीब 36 फीसदी पाया गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि हार्ट अटैक की सटीक भविष्यवाणी के लिए अभी और शोध की जरूरत है।

पुरुषों में लक्षण
सीने में दर्द या बेचैनी
सांस लेने में दिक्कत
बाएं हाथ, जबड़े में दर्द
जी मिचलाना

महिलाओं में लक्षण
सांस में परेशानी, पसीना आना
पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द
सीने में जलन, बेचैनी
चक्कर आना, जी मिचलाना