
एक्स-रे बहुत ज्यादा एनर्जी वाली विद्युत चुम्बकीय विकिरण है। जिसे कई बार एक्स-रेडिएशन भी कह दिया जाता है। एक्स-रेज कई तरह के काम आती हैं। जिसमें टूटी हुई हड्डियों का पता लगाना, बीमारियों का पता लगाना शामिल है। इनका उपयोग सुरक्षा के लिए भी किया जाता है, क्योंकि इनसे छुपे हुए हथियारों का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
एक्स रेज इलेक्ट्रॉनों को उत्सर्जित करती हैं और जब हमारे टिशु एक्स रेज के संपर्क में आते हैं, तो यह इलेक्ट्रॉन हमारे डीएनए की जंजीरों को तोड़ सकते हैं, जिसकी वजह से कैंसर का खतरा हो सकता है। क्लेरेंस मैडिसन डैली पहले व्यक्ति थे, जिनकी मौत एक्स रेज की वजह से हुई। उन्होंने थॉमस एडीसन के एक्स रे लाइट बल्ब पर कई साल तक काम किया था। जिसकी वजह से उनके शरीर में कैंसर के कई घाव हो गए और महज 39 साल में उनकी मृत्यु हो गई।
किसने की खोज
वर्ष 1895 में एक्स रे की खोज करने वाले वैज्ञानिक विलहम रॉटजन थे, जो जर्मनी के रहने वाले थे। उनके नाम पर कई बार एक्स रेज को रॉटजन विकिरणें भी कह दिया जाता है। बताया जाता है कि पहला एक्स रे उनकी पत्नी का हाथ था, जिसमें उनकी शादी की अंगूठी भी शामिल थी। विलहम रॉटजन से एक्स रेज की खोज अनायास हुई थी।
असल में वे एक दिन वैक्यूम ट्यूबों के साथ कुछ प्रयोग कर रहे थे। तब अचानक उन्होंने विचित्र तरह की विकिरणों को महसूस किया। बाद में पता चला कि यह साधारण तरंगे नहीं थी। खोज होने के बाद रॉटजन इस बात से अनजान थे, कि यह कौन सी तरंगें है। इसलिए उन्होंने इन तरंगों को ‘एक्स रे’ नाम दे दिया। एक्स का उपयोग आमतौर पर उन चीजों या व्यक्तियों के लिए किया जाता है, जो कि अज्ञात होते हैं।
एक्स रेज की खोज के लिए विलहम रॉटजन को वर्ष 1901 में नोबेल पुरस्कार मिला था। विलहम की पत्नी अपने पति के आविष्कार से खुश नहीं हुई थी। उन्होंने अपने हाथ की डरावनी छवि देखने के बाद कहा कि, ‘मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैंने अपनी मौत देख ली हो।’ एक्स रे की सहायता से चिकित्सा के क्षेत्र में काफी लाभ होने वाला था। इसलिए विलहम रॉटजन ने इसका पेटेंट नहीं करवाया, क्योंकि वह चाहते थे कि उनके आविष्कार से हर किसी का लाभ होना चाहिए।
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Published on:
03 Jul 2022 09:50 pm
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