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गहलोत की अदावत के बाद भी इस बार शांत क्यों है धारीवाल, आखिर क्या कर रहे हैं उनके 5 सिपहसालार

Cm politics of rajasthan: राजस्थान की सियासत में बगावत और अदावत की शमशीरें तन चुकी है। कुर्सी अखाड़ा बनी हुई है। सूरमा मयान से तलवारें खींच चुके हैं। पायलट का गुट हो या फिर मुख्यमंत्री गहलोत का गुट, दोनों ही एक दूसरे को फूंटी आंख नहीं देखना चाहते, लेकिन इस बार दोनों की राजनीति में सायनापन है।

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Cm politics of rajasthan: राजस्थान की सियासत में बगावत और अदावत की शमशीरें तन चुकी है। कुर्सी अखाड़ा बनी हुई है। सूरमा मयान से तलवारें खींच चुके हैं। पायलट का गुट हो या फिर मुख्यमंत्री गहलोत का गुट, दोनों ही एक दूसरे को फूंटी आंख नहीं देखना चाहते, लेकिन इस बार दोनों की राजनीति में सायनापन है।

इसे सितंबर में अदावत का सितम कहें या फिर शह-मात का खेल, फिलहाल ये तूफान से पहले की शांति है, ये तो सिपहसालार ही जाने लेकिन सब देख रहें है कि दोनों ही पक्षों की तलवारें अपनी म्यानों से निकलने को आतुर हैं। हालांकि इस बार अशोक गहलोत के पक्ष के पांचों सिपहसालार शुतुरमुर्ग बने हुए हैं।

'बड़ा दिल दिखाते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दें अशोक गहलोत'

गहलोत के मोर्चा खोलने के बाद भी उनका कोई भी सिपहसालार इस समय अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं है। फिर चाहे शांति धारीवाल की बात हो या फिर पूरे प्रताप से लड़ने वाले प्रताप सिंह खाचरियावास की। महेश जोशी का भी जोश इस बार ठंड पड़ा हुआ है तो धमेंद्र राठौड़ की भी हरकतें ठप्प हैं। हरीश चौधरी का भी बयान अलग तरह से सामने आ रहा है।

कुछ ऐसा कर रहे हैं गहलोत के पंच प्रमुख

शांति धारीवाल
सितंबर में अदावत का मोर्चा संभालने वाले और पर्यवेक्षकों को बैरंग लौटाने वाले शांति धारीवाल इस बार कतई शांत हैं। वह अधिकारियों और नेताओं के बीच समंजस्य बनाने की बात कर रहे हैं।
प्रताप सिंह खाचरियावास
पर्यवेक्षकों को अपने प्रताप से वाकिफ कराने वाले खाचरियावास इस बार अधिकारियों की एसीआर लड़ाई में उलझे हुए हैं। सचिन पायलट कुछ दिनों पहले इनके घर भी होकर आए थे। यह पहले पायलट गुट में ही थी।
महेश जोशी
जलदाय विभाग में हेराफेरी और अपने पुत्र के कृत्य को लेकर इस बार महेश जोशी पहले ही घिरे हुए हैं। इसे में इस बार यह भी अशोक गहलोत के साथ मिलकर सीधे बयानबाजी कर रहे और न ही सक्रिय दिखाई दे रहें हैं।
धमेंद्र राठौड़
अशोक गहलोत के बेहद खास और एजेंसियों के निगाह में चढ़े हुए धमेंद्र राठौड़ का भी पर्यटन इस बार कम हो रहा है। इस बार यह राजनीति के कोई गड़बड़ नहीं करना चाह रहे हैं जिससे वह आलाकमान की तीर का शिकार हो जाएं।
हरीश चौधरी
हरीश चौधरी ने एक बार सभी को साध लिया है। उन्होंने अशोक गहलोत को 102 विधायकों को सरंक्षक बताया है। इसके साथ फैसला लेने का इशारा आलाकमान की तरफ कर दिया है यानी वह सरंक्षक है तो उनके समर्थन में रहेंगे और यह भी कि जो फैसला आलाकमान आएगा उसे भी माना जाएगा।