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कान्हा के जन्मदिन पर क्यों बरसते हैं बादल, क्या है लोकमान्यता और वैज्ञानिक आधार, जानिए

- मौसम विभाग ने आज से अगले 3 दिन तक बारिश का जारी किया है अलर्ट- पहले भी अनेकों बार हो चुकी है जन्माष्टमी पर बरसात

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जयपुर

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Pawan kumar

Aug 24, 2019

shri Krisana Janamastmi

shri Krisana Janamastmi

जयपुर। आज 24 अगस्त का दिन है यानी कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी है। और ये दिन इसलिए खास है क्योंकि आज भगवान श्रीकृष्ण का हैप्पी बर्थडे है। मान्यता के अनुसार कान्हा का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि को हुआ था। भारत ही नहीं दुनिया में कृष्ण जन्माष्टमी को उत्सव की तरह मनाया जाता है। आज राजस्थान समेत देशभर में कान्हा का बर्थडे धूमधाम से सेलिब्रेट किया जा रहा है। कान्हा के जन्मदिन के साथ कई लोक मान्यताएं प्रचलित है। उनमें से एक है कृष्ण जन्माष्टमी के दिन बरसात होना।

यमुना ने पखारे थे पैर
प्राचीन मान्यता है कि जब कंस की कारागृह में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। तो माता देवकी और पिता वासुदेव ने अपनी आठवीं संतान कान्हा को सुरक्षित जगह पहुंचने का फैसला किया। भादौं महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि जब वासुदेव नन्हे कान्हा को नंद गांव पहुंचाने के लिए यमुना नदी में उतरे तो यमुना ने भगवान श्रीकृष्ण के चरण पखारने की कोशिश की, लेकिन यमुना का जलस्तर इतना नहीं था कि यमुना जल वासुदेव के सिर पर टोकरी में विराजे भगवान कृष्ण के चरणों तक पहुंच सके। इसलिए यमुना नदी की इच्छा को देखते हुए मध्यरात्रि को बादल इतनी जोर से बरसे कि यमुना में बाढ़ आ गई और नदी का जलस्तर इतना हो गया कि पानी बालरूप भगवान कृष्ण के पैरों को छू गया। लेकिन इससे वासुदेव के सामने संकट पैदा हो गया कि भारी बारिश में उफनती यमुना नदी को वासुदेव पार करे तो कैसे करे। लोक मान्यता है कि वासुदेव की इसी चिंता को जानकार यमुना ने वासुदेव को रास्ता दिया और कान्हा मां यशोदा के पास नंद गांव पहुंचे। 2019 की बात करें तो इस वक्त यमुना नदी उफान पर है।

पोतड़े धोने बरसते हैं बादल
देश के कुछ हिस्सों में मान्यता ये भी है कि बालरूप कृष्ण को पहनाए जाने वाले वस्त्र जिन्हें स्थानीय भाषा में पोतड़े कहा जाता है, उन्हें धोने के लिए कृष्ण जन्माष्टमी के दिन या इसके अगले दिन बारिश आती है। बहुत से अवसर ऐसे आएं हैं जब देश के बहुत से हिस्सों में जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को बारिश आई है। इसके कारण इस लोक मान्यता को बल मिला है।

ये है मॉनसूनी-वैज्ञानिक कारण
अब कान्हा के जन्मदिन पर बारिश आने की लोक मान्यता से इतर वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो मौसम विभाग ने भी पूर्वी राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में 24 अगस्त से 26 अगस्त तक बरसात होने की पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वी राजस्थान जिसमें ब्रज अंचल आता है वहां पर कृष्ण जन्माष्टमी पर भारी बारिश होने के आसार है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में जून से सितम्बर तक मॉनसून सीजन के दो हिस्से होते हैं। पहला चरण में देश के दक्षिण—पश्चिमी समुद्री हिस्से और बंगाल की खाड़ी के रास्ते मॉनसूनी बादल विभिन्न राज्यों से होते हुए हिमालय तक आते हैं। इसके कारण 15 जून से 15 अगस्त तक बारिश का दौर चलता है। इसके बाद मॉनसून सुस्त पड़ जाता है और करीब एक सप्ताह बाद मॉनसूनी बादल फिर से सक्रिय होते हैं। दूसरे चरण में मॉनसूनी बादल सक्रिय होते है तो उमस और गर्मी के कारण स्थानीय परिस्थितयों के मुताबिक कहीं ज्यादा तो कहीं कम बारिश होती है। वैज्ञानिक कारणों में जन्माष्टमी के दिन या इसके आसपास बारिश होने कारण मॉनसून के फेज—2 की सक्रियता है। अब कृष्ण भक्तों को उम्मीद है कि इस बार भी कान्हा के जन्मदिन पर बादल जमकर बरसेंगे।


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