
टखने में चोट के बाद महिला का चलना हुआ दुभर, सर्जरी के बाद चलने लगी, डॉक्टरों का दावा: राज्य में पहला ऐसा इंप्लांट
जयपुर। टखने की दुर्लभ चोट से जूझ रहीं एक महिला के लिए चलना भी संभव नहीं हो पा रहा था। उनके टखने का टेंडन अपनी जगह से उखड़ गया था। जिसके कारण वे अपने पैर पर जरा भी वजन नहीं झेल पा रही थीं। उन्हें राहत मिली एक निजी हॉस्पिटल में, जहां उनकी बेहद जटिल हुई और प्रदेश में पहली बार इस तरह की एंकल (टखना) सर्जरी में बायो इंडक्टिव कोलाजिन इंप्लांट का इस्तेमाल किया गया। हॉस्पिटल के सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन और स्पोर्ट्स इंजरी एक्सपर्ट डॉ. आदित्य सोरल ने यह सफल केस किया। उत्तर भारत में यह तीसरा केस है। वहीं देश में इस तरह के अब तक सिर्फ 40 ही केस हो सके हैं।
डॉ आदित्य सोरल ने बताया है टेंडन एकिलीज की चोट एक दुर्लभ चोट होती जिसमें हमारे टखने के पीछे एक लाइन जैसी बनावट जिसे टेंडन कहते हैं, वह उखड़ जाती है। इसका इलाज भी जटिल होता है। सर्जरी में टेंडन को सही जगह लगाने के बाद भी उसका जगह से वापस हटने की संभावना बहुत अधिक होती है क्योंकि वहां रक्तप्रवाह बहुत कम होती है और टेंडन भी नष्ट हो चुका होता है।
इस केस में बायो इंडक्टिव कोलाजिन इंप्लांट का इस्तेमाल किया गया जो प्रदेश में पहली बार हुआ। यह इंप्लांट एक तरह की कोलाजिन की झिल्ली है जो टेंडन को रिकवरी करने में मदद करती है। इस इंप्लांट का नाम रीजेनेटिन है और यह स्मिथ एंड नेफ्यू कंपनी द्वारा भारत में अवेलेबल कराया जा रहा है। डॉ. आदित्य सोरल ने बताया कि यह इंप्लांट एंकल इंजरी और कंधे की रोटेटर कफ इंजरी में काम आता है। इस केस को सफल बनाने में सीनियर एनिस्थोसियोलॉजिस्ट डॉ. मोना बाना और उनकी टीम, हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव भार्गव और डॉ. विनय गुप्ता, डॉ. आकाश बंसल और डॉ. आकांक्षा चंद्रा का विशेष सहयोग रहा। इस मौके पर हॉस्पिटल की को-चेयरपर्सन मंजू शर्मा और सीईओ डॉ. प्राचीश प्रकाश ने कहा कि हमें खुशी है कि मरीज को दुर्लभ चोट लगने के बाद भी उन्हें सुगम इलाज मिल सका। हमारा प्रयास रहता है कि मरीज के लिए यथासंभव इलाज एक ही जगह उपलब्ध हो।
Published on:
21 Jan 2024 10:30 pm
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