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विश्व महिला दिवस पर विशेष: हौसले के दम पर अंजू बनी प्रेरणास्रोत

जिंदगी में अगर लक्ष्य बड़ा हो तो संघर्ष भी करना पड़ता है, रुकावटें कई आतीं हैं पर हिम्मत कभी नहीं हारनी चाहिए। ऐसा ही जज्बा दिखाया है नांदिया निवासी अंजू चौहान ने।

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sandeep srivastava

Mar 08, 2016

जिंदगी में अगर लक्ष्य बड़ा हो तो संघर्ष भी करना पड़ता है, रुकावटें कई आतीं हैं पर हिम्मत कभी नहीं हारनी चाहिए। ऐसा ही जज्बा दिखाया है नांदिया निवासी अंजू चौहान ने। अंजू अपने पुत्र हर्षद (10) के साथ थैलेसीमिया से बीमार अन्य बच्चों के लिए भी जंग लड़ रही है। वह जिले में हर रक्तदान शिविर में जाकर लोगों को प्रेरित कर रही है ताकि उसकी संतान के साथ अन्य बच्चों को खून की कभी कमी नहीं आए।

वह आदिवासी क्षेत्र के साथ दूर-दराज गांवों में घूमकर अन्य महिलाओं के दर्द समझकर उनको भी हौसले से जीना सिखा रही है। आज स्थिति यह है कि थैलेसीमिया ग्रसित बच्चों को खून बदलने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है। यहां आबूरोड के ग्लोबल संस्थान में आसानी से खून उपलब्ध हो रहा है। साथ ही उनका इलाज भी निशुल्क हो रहा है।


और बढ़ता गया कारवां
अंजू के हौसलों की परीक्षा उसके पुत्र हर्षद से शुरू होती है। वह चार साल का था तो थैलेसीमिया बीमारी का पता चला। प्रतिदिन मां को उसकी जिंदगी के लिए संघर्ष करना पड़ता था।

बच्चे के उपचार के लिए लम्बे समय तक स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई। कड़े संघर्ष के बाद दिल्ली एम्स में उपचार में कामयाबी मिली। इसके बाद मानस बनाया कि वह शिक्षित होने से इस मुकाम तक पहुंच सकती है लेकिन जो अनपढ़ माता-पिता हैं, उनका क्या होगा।

उसने ग्रामीणों, शहरवासियों, दानदाताओं, संस्थानों से बात कर थैलेसीमिया पीडि़तों के लिए रक्तदान का आह्नान किया। इस पर ग्रामीण मानव सेवा के लिए आगे आए और बढ़-चढ़कर शिविर में रक्तदान करने लगे। स्थिति यह है कि बच्चों के लिए खून बदलने का साल का स्टॉक रहता है। साथ ही, चिकित्सक भी निशुल्क सेवा दे रहे हैं।

पशु-पक्षियों की सेवा के लिए भी तत्पर

अंजू निशक्त, बेजुबान पशु-पक्षियों की सेवा के लिए भी तत्पर रहती है। इसके कार्य को देख सामाजिक संस्थाएं भी आगे आने लगीं। उसके प्रयासों से दुर्घटना में घायल, गर्भवती महिला और बीपीएल परिवार को खून की व्यवस्था हो जाती है।

इन वजह से बनी मसीहा

-सिरोही जिले में करीब 15 बच्चे थैलेसीमिया से बच्चे ग्रसित हैं। वह इनके लिए काम कर रही है।
-कोदरला में आदिवासी बालिका रिंकू का पैर काटना पड़ेगा। कृत्रिम पैर लगाने के लिए अंजू ने दानदाताओं से सम्पर्क किया तो उन्होंने हामी भरी।
-आबूरोड में एक बालिका के हृदय में छेद है। अंजू के प्रयासों से दानदाता ने गुप्त राशि दी। अब बालिका का एक महीने बाद अहमदाबाद में ऑपरेशन होगा।
-स्वयं ने मरणोपरान्त आबूरोड के ग्लोबल संस्थान को आंखें दान देने की घोषणा के साथ अन्य अंगदान के लिए सीएमएचओ के समक्ष पत्र से इच्छा जाहिर की।