
जयपुर।
महिला आरक्षण बिल के संसद से पास होने के सफर में राजस्थान के तीन किरदारों की सबसे ख़ास भूमिका रही। इनमें केंद्रीय क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्य सभा में सभापति जगदीप धनखड़ शामिल हैं।
मेघवाल ने पेश किया बिल
संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार की ओर से ये बिल सबसे पहले क़ानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पेश किया था। मेघवाल ने इस दौरान इस बिल के तमाम पहलुओं का विस्तृत ब्यौरा सदन की पटल पर रखा और उसपर अपने विचार व्यक्त किए थे।
मेघवाल राजस्थान के बीकानेर से सांसद हैं और केंद्र में राज्य मंत्री हैं, जिन्हें हाल ही में प्रमोट करते हुए क़ानून मंत्रालय का अतिरिक्त ज़िम्मा भी दिया गया था। वे लोकसभा में ही संसदीय कार्य मंत्री भी हैं।
महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पास होने पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, 'संसद के इतिहास में 27 साल के लंबे इंतजार के बाद ये ऐतिहासिक पल रहा है। संसद के नए सदन में इस बिल का पास होना अपने आप गौरव करने वाला क्षण है।'
बिरला की अध्यक्षता में लोकसभा से पारित
लोकसभा से ये महत्वपूर्ण बिल स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में पास हुआ। उन्हीं की अनुमति के बाद नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस बिल पर अपने विचार सदन में रखे। विचार और चर्चा करने के बाद स्पीकर बिरला की मंज़ूरी के बाद महिला आरक्षण बिल को लोकसभा से पारित किया गया। गौरतलब है कि स्पीकर बिरला का ताल्लुक राजस्थान से ही है और वे कोटा से चुनकर संसद पहुंचे हैं।
राज्य सभा में धनखड़ की रही भूमिका
ऐसा ही कुछ राज्य सभा में भी देखा गया, जहां उपराज्यपाल जगदीप धनखड़ की अध्यक्षता में महिला आरक्षण बिल सदन में पेश हुआ और इसपर चर्चा हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने विचार रखे। यहना भी विचार और चर्चा करने के बाद इसे पारित घोषित किया गया।
धनखड़ ने इस बिल के राज्य सभा से पास होने के ऐतिहासिक मौके को देश में नारी शक्ति के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया। गौरतलब है कि राज्य सभा में सभापति जगदीप धनखड़ भी राजस्थान के झुंझुनू से ही आते हैं और उनका एक लंबा राजनीतिक सफर रहा है।
Published on:
22 Sept 2023 11:58 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
