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जयपुर डिस्कॉम के वर्क ऑर्डर में उपभोक्ता या ठेकेदार, किसे फायदा, इंजीनियरों ने उठाए सवाल

जयपुर डिस्कॉम के अधीन जयपुर समेत अन्य जिलों में फॉल्ट आने पर बिजली गुल की शिकायतों के समाधान के लिए 476 करोड़ का कार्यादेश जारी किया है। लेकिन कार्यादेश में फर्म फ्रेंडली शर्तों को लेकर इंजीनियरों ने नाराजगी जताई।

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डिस्कॉम में बिजली मेंटीनेंस के वर्क ऑर्डर, पत्रिका फोटो

JVVNL: जयपुर डिस्कॉम के अधीन जयपुर समेत अन्य जिलों में फॉल्ट आने पर बिजली गुल की शिकायतों के समाधान के लिए 476 करोड़ का कार्यादेश जारी किया है। लेकिन कार्यादेश में फर्म फ्रेंडली शर्तों को लेकर इंजीनियरों ने नाराजगी जताई। डिस्कॉम के सीनियर इंजीनियरों का कहना है कि काम की शर्तों को लेकर प्रबंधन ने फर्म के प्रति दरियादिली दिखाई है। ऐसे में प्रबंधन को वित्तीय नुकसान तो होगा ही साथ ही उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान में देरी भी होना तय है।

वित्तीय नुकसान, शिकायतों के समाधान में देरी तय

बिजली इंजीनियरों का मानना है कि बिजली गुल की शिकायतों के समाधान के लिए जारी कार्यादेश में फर्म फ्रेंडली शर्तों से डिस्कॉम को वित्तीय नुकसान की आशंका है। दूसरी तरफ ​बिजली शिकायातों के समाधान में भी देरी होना तय है। शुरूआत से ही फर्म के प्रति नरम रवैया बरतने से उपभोक्ताओं की शिकायतों पर सुनवाई गंभीरता से होगी इस पर संशय है।

कार्यादेश की शर्तें ऐसे लगी फर्म फ्रेंडली

बिना स्थायी वित्त-तकनीकी निदेशक के 476 करोड़ का टेंडर कैसे किया।
राष्ट्रीय बैंकों के साथ शेड्यूल बैंक यानी प्राइवेट बैंक गारंटी देने का नियम क्यों।
प्राइस वैरिएशन का प्रावधान किस आधार पर रखा गया।
नियामक आयोग की गाइड लाइन के अनुसार ए क्लास सिटी क्यों नहीं शामिल।
विद्युत उपभोक्ता अधिकार नियम-2020 के अनुसार क्षतिपूर्ति राशि 500 रुपए प्रतिदिन, फिर 150 और 300 रुपए की पैनल्टी क्यों। शेष राशि किसके की ओर से वहन की जाएगी।
विद्युत निरीक्षणालय की ओर से मान्यता प्राप्त सुपरवाइजर की नियुक्ति का प्रावधान नहीं।

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