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world brothers day हमारे रिश्ते को आप यूं समझिए कि हम दो जिस्म हैं, लेकिन हमारी रूह एक है: डागर बंधु

संगीत घरानों से जुड़े भाइयों की आपसी 'जुगलबंदी'

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जयपुर

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Mohmad Imran

May 24, 2023

world brothers day हमारे रिश्ते को आप यूं समझिए कि हम दो जिस्म हैं, लेकिन हमारी रूह एक है: डागर बंधु

world brothers day हमारे रिश्ते को आप यूं समझिए कि हम दो जिस्म हैं, लेकिन हमारी रूह एक है: डागर बंधु

जयपुर. आज world brothers day है। पूरी दुनिया में 24 मई को भाइयों के प्यार और परिवार के लिए उनके योगदान के रूप में इस दिन को समर्पित किया गया है। पत्रिका प्लस ने जयपुर के दो बड़े संगीत घरानों से जुड़े दो भाइयों की जोड़ी से बात की और ब्रदर्स डे पर उनके बीच की जुगलबंदी और कैमिस्ट्री को समझा।
ध्रुपद गायकी के लिए देश-विदेश में जयपुर का नाम रोशन कर चुके डागर परिवार की २०वीं पीढ़ी के रूप में नफीसुद्दीन डागर और अनीसुद्दीन डागर ने बताया, 'हम दोनों भाइयों को संगीत के साथ हमारी सोच और टेम्परामेंट भी जोड़ती है। हम दोनों भाई जब गाते हैं, तो हम एक हो जाते हैं। जब हम परफॉर्म करते हैं, तो पहले बड़े भाई शुरू करते हैं। जुगलबंदी के लिए हम दोनों के बीच यह रिश्ता होना बहुत जरूरी है। हमारे वालिद और उस्ताद सइदुद्दीन डागर और अम्मी रेहाना डागर ने हमें हमेशा एक-दूसरे का हाथ थामे रखना सिखाया।

हमारी जोड़ी को कभी नजर न लगे
बड़े भाई नफीसुद्दीन डागर कहते हैं, 'हम दोनों के बीच की समझ बहुत अच्छी है। हम दोनों की जोड़ी को किसी की नजर न लगे बस यही दुआ करते हैं। हम दोनों का सोचना भी एक जैसा है। वह मुझे प्यार से 'आई' भी कहते हैं।' छोटे भाई अनीसुद्दीन डागर कहते हैं कि हम दो जिस्म एक जान हैं। हम दोनों एक-दूसरे का मां-बाप की तरह सम्मान करते हैं।

तोशी भाई के लिए पीठ पर टैटू बनवाया: शारिब
साबरी घराने के तोशी साबरी और शारिब साबरी ने जयपुर से मुंबई तक जयपुर के संगीत को पहुंचाया है। दोनों भाई संगीत से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनका रिश्ता इससे भी बढ़कर है। छोटे भाई शारिब बताते हैं कि उन्होंने अपने बड़े भाई के लिए अपने प्यार को दर्शाने के लिए अपनी पीठ पर एक टैटू बनवाया है। शारिब का कहना है कि भाइयों के लिए एक दिन नहीं बल्कि ३६५ दिन कम हैं।

हम एक-दूसरे के लिए पूरी तरह समर्पित
बड़े भाई तोशी का कहना है कि हमारा रिश्ता बहुत प्यारा और जिंदगी भर का साथ है। शारिब ने अपनी पीठ पर हम दोनों के हाथ का टैटू बनवाया है। मैं भी उसके लिए बहुत जिम्मेदारी और प्यार महसूस करता हूं। तोशी कहते हैं कि हम दोनों जब काम करते हैं, तो कभी-कभी हमारी कुछ बातों पर सहमति नहीं बनती है, लेकिन यही चीज हमें एक-दूसरे के साथ जोड़े रखती है। हमारे उस्ताद और वालिद हाजी अकरम साबरी साहब ने हमें हमेशा यही सिखाया कि साथ नही छोडऩा कभी हाथ नहीं छोडऩा, जिसे हम ताउम्र निभाएगें।