
झालावाड़ जिले के सुनेल क्षेत्र के एक स्कूल में मिड डे मील के तहत भोजन करते बच्चे।
जयपुर। बच्चे तो भगवान का रूप हैं, इसे समझते हुए संयुक्त राष्ट्र साधारण सभा ने 79 साल पहले ही बच्चों के मुद्दों को प्राथमिकता देने के लिए 20 नवम्बर को विश्व बाल दिवस मनाने की पहल की।
इसके बावजूद राज्य विधानसभा चुनाव के लिए जारी हो रहे राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में बच्चों का अलग से वर्ग के रूप में जिक्र नहीं है, जिस पर बच्चों के लिए काम करने वालों का कहना है कि बच्चों का वोट नहीं होता शायद इसी कारण घोषणा पत्रों में अलग से उनका जिक्र नहीं होता।राजस्थान में भाजपा का घोषणा पत्र जारी हो चुका है और कांग्रेस की ओर से घोषणा पत्र जारी किए जाने की तैयारी है। वैसे घोषणा पत्र में मुद्दों के वर्गीकरण को लेकर मध्यप्रदेश में जारी कांग्रेस का घोषणा पत्र देखा जाए, तो उसमें भी राजस्थान में जारी भाजपा के घोषणा पत्र की तरह बच्चों के मुद्दों की अलग से कोई श्रेणी नहीं है। बच्चों के मुद्दों पर काम करने वालों का इस बारे में कहना है कि राजनीतिक दल बच्चों के मुद्दों के नाम पर शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा वर्ग में ही बच्चों का एजेण्डा शामिल करते हैं, किसान, महिला, अल्पसंख्यक, एससी-एसटी, दिव्यांग प कर्मचारियों की तरह अलग से बच्चों के मुद्दों की कोई श्रेणी नहीं बनाई जाती।
करीब 2.80 करोड़ आबादी मतदाता नहींजनसंख्या संबंधी राष्ट्रीय आयोग के अनुसार एक मार्च 23 को प्रदेश की अनुमानित आबादी 8 करोड़ 10 लाख 25 हजार है, जबकि राज्य के चुनाव विभाग के अनुसार वर्तमान में 5 करोड़ 29 लाख 31 हजार 152 मतदाता हैं। इसके हिसाब से प्रदेश में 18 साल से कम आयु वालों की अनुमानित आबादी 2.80 करोड़ है, जो कि कुल आबादी का करीब 35 प्रतिशत है।
बच्चों के संबंध में ये मुद्दे प्रासंगिक- जलवायु परिवर्तन
- शिक्षा- मानसिक स्वास्थ्य
- जाति, धर्म व नस्लों के आधार पर भेदभाव- इन्टरनेट पर बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल
- अपराध के लिए बच्चों का इस्तेमाल, कैसे हो इन बच्चों का पुनर्वास- बाल मृत्यु दर
- आंगनबाडी व्यवस्था का सुदृढीकरण- बच्चों का टीकाकरण
दलों का ध्यान खींचना हमारा काम नहीं
बच्चों के मुद्दों को राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि मुझे यह पता नहीं है कि चुनाव वाले पांच राज्यों में दलोंं ने बच्चों का घोषणा में जिक्र किया है या नहीं? बच्चों के मुद्दों की ओर राजनीतिक दलों का ध्यान दिलाना आयोग का काम नहीं है।-प्रियंक कानूनगों, अध्यक्ष, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोगहमने जारी किया है बच्चों का मांग पत्र
संभाग स्तर पर चर्चा के बाद बच्चों एवं किशोर-किशोरियों के समग्र विकास के लिए प्रदेश स्तरीय मांग पत्र जारी किया गया है। इसमें बच्चों से संबंधित विभिन्न मुद्दों की ओर ध्यान दिलाया गया है। पिछली बार भी इसी तरह का मांग पत्र जारी किया गया था। - विजय गोयल, प्रतिनिधि, राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण साझा अभियान
Published on:
19 Nov 2023 10:38 pm
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