
World Hemophilia Day 2023: हीमोफीलिया से सावधान, छोटी सी चोट हो सकती है जानलेवा
World Hemophilia Day 2023: प्रदेश में हीमोफीलिया की वजह से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान में करीब 1400 मरीज ऐसे हैं, जो हीमोफीलिया से ग्रसित हैं। यह आंकड़े हीमोफीलिया सोसायटी के हैं। इसके अलावा कई मरीज ऐसे भी हैं, जिन्हें यह पता नहीं है कि वह इस बीमारी से ग्रसित हैं। ऐसे में कई मरीज डॉक्टर्स के पास देरी से पहुंचते हैं, जिनका इलाज देरी से शुरू होता है। प्रदेश के ग्रामीण और दूर दराज के इलाकों में लोग इसको लेकर अवेयर नहीं हैं।
इलाज चलता है जीवन भर:
डॉ. मानसी शाह का कहना है हीमोफीलिया जेनेटिक डिसऑर्डर है। इसमें ब्लड का थक्का नहीं बन पाता। हीमोफीलिया होने पर खून में क्लॉटिंग फैक्टर की कमी हो जाती है। ये क्लॉटिंग फैक्टर एक खास तरह का प्रोटीन है। इसके होने पर इसके साथ ही जीना पड़ता है। उतना ही हीमोफीलिया खतरनाक माना जाता है, जितना क्लॉटिंग फैक्टर कम होता है।
हर 5000 में से एक को होता है हीमोफीलिया:
हीमोफीलिया मुख्यत दो प्रकार का होता है। एक हीमोफीलिया ए और दूसरा हीमोफीलिया बी। हीमोफीलिया ए हर 5000 में से एक व्यक्ति को होता है, जबकि हीमोफीलिया बी हर 20000 में से एक में देखने को मिलता है। हीमोफीलिया बी को क्रिसमस फैक्टर भी कहा जाता है।
हीमोफिलिया ए (क्लासिक हीमोफिलिया) क्लॉटिंग फैक्टर VIII की कमी या कमी के कारण होता है
हीमोफिलिया बी (क्रिसमस रोग) क्लॉटिंग फैक्टर IX की कमी या कमी के कारण होता है
यह बीमारी ज्यादातर पुरुषों को प्रभावित करती है। महिलाएं इसकी वाहक होती हैं।
ये हैं लक्षण:
जोड़ों में दर्द
नाक से खून आना
चोट लगने पर ब्लीडिंग बंद ना होना
डेंटल सर्जरी के बाद ब्लीडिंग ना रुकना
मसूड़ों से ब्लीडिंग
हीमोफीलिया का ट्रीटमेंट:
हीमोफीलिया के इलाज के लिए अनुपस्थित क्लॉटिंग फैक्टर को रिप्लेस करना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। इस तरीके की मदद से खून का थक्का बनने की प्रक्रिया को सामान्य करने में मदद मिलती है
विश्व हीमोफीलिया दिवस 2023 की थीम:
विश्व हीमोफीलिया दिवस 2023 की थीम वर्ल्ड हीमोफीलिया फेडरेशन द्वारा जारी की गई है। इस वर्ष की थीम “सभी के लिए पहुंच: देखभाल के वैश्विक मानक के रूप में रक्तस्राव की रोकथाम” है। जागरूकता से हीमोफीलिया की पहचान जल्दी की जा सकती है। इससे होने वाली जटिलताओं से भी बचा जा सकता है।
इनका कहना है:
हीमोफीलिया मरीजों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। कहीं चोट न लगे, इस बात का पूरा ध्यान रखना जरूरी है। हीमोफीलिया को लेकर पिछले कुछ सालों में लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
- डॉ. मानसी शाह,
जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल, उदयपुर
हीमोफीलिया बीमारी की बात करें तो 40 से 50 फीसदी ऐसे मरीज हैं, जिन्हें इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं होती। ब्लीडिंग होने पर यह स्वत: इलाज करते हैं। ऐसे मरीज डॉक्टर्स के पास देरी से पहुंचते हैं, तब यह डायग्नोसिस होता है। वहीं प्रदेश में हीमोफीलिया को लेकर बेहतर इलाज की सुविधा है।
- डॉ कपिल गर्ग,
जेके लोन अस्पताल, जयपुर
Published on:
17 Apr 2023 08:21 am
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