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जितेन्द्र सिंह शेखावत / जयपुर। गुलाबीनगर के बेहतरीन हैरिटेज और पेयजल के लिए रामगढ़ बांध की माकूल व्यवस्था होने की वजह से जयपुर को राजस्थान की राजधानी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आजादी के बाद राजपूताना की देसी रियासतों का विलय कर संयुक्त राजस्थान बनाने की प्रक्रिया के साथ ही भारत सरकार ने राजधानी बनाने के लिए फजल अली आयोग का गठन कर दिया था।
आयोग के निर्देश पर बनी सत्यनारायण राव कमेटी ने राजधानी कायम करने के लिहाज से कोटा, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर और जयपुर का अध्ययन किया। वरिष्ठ पत्रकार सीताराम झालानी के मुताबिक कमेटी के जयपुर आगमन पर नगर परिषद अध्यक्ष श्याम बिहारी लाल सक्सेना ने सवाई मानसिंह टाउन हॉल यानी पुरानी विधानसभा के ऊपर बने लॉन में कमेटी सदस्यों के लिए अल्पाहार का आयोजन किया था। उस समय बरसात के मौसम में कमेटी के सदस्यों को नाहरगढ़ की हरी-भरी पहाडिय़ों के अलावा सिटी पैलेस, गढ़ गणेश, जंतर-मंतर, जलेब चौक, हवा महल आदि हैरिटेज इमारतों का दृश्य बहुत ही मनोरम और सुहावना लगा। विधानसभा के लॉन में चल रहे फ्व्वारों की छटा से प्रभावित कमेटी ने जयपुर को ही राजस्थान की राजधानी बनाने का मन बना लिया था।
वल्लभ भाई पटेल ने किया था ऐलान
30 मार्च 1949 को सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सिटी पैलेस के दरबार हॉल में संयुक्त राजस्थान का उद्घाटन किया तब उन्होंने सवाई जयसिंह के बसाए जयपुर व उसके हैरिटेज की तारीफ करते हुए राजधानी बनाने की घोषणा भी कर दी थी। विधानसभा, सचिवालय की इमारतों के अलावा रामगढ़ बांध की पेयजल योजना, बिजली , विश्वविद्यालय कॉलेज स्कूलों की अच्छी सुविधाओं के के कारण जयपुर राजधानी बना। अजमेर को प्रदेश के बीच का शहर मानते हुए राजधानी बनाने का मामला फिर उठा लेकिन अजमेर में पेयजल की माकूल व्यवस्था नहीं होने से प्रस्ताव को नहीं माना गया। जोधपुर, कोटा व उदयपुर के महाराजाओं ने अपने नगरों को राजधानी बनाने के लिए भारत सरकार पर पूरा दबाव बनाया लेकिन आखिर में जयपुर ही राजधानी बना।
Published on:
18 Apr 2019 07:32 am
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