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विश्व संग्रहालय दिवस आज, एक्सपर्ट की नजर से जानें गुलाबी नगर में म्यूजियम और उससे जुड़ा विजन

जयपुर में म्यूजियम के क्षेत्र में अब भी बहुत काम करना बाकी है

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आज विश्व संग्रहालय दिवस (वल्र्ड ट्यूरिज्म डे) है। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद प्रतिवर्ष 18 मई को इसे एक नई थीम के साथ सेलिब्रेट करती है। इसका उद्देश्य लोगों में यह जागरूकता बढ़ाना है कि 'संग्रहालय सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच आपसी समझ, सहयोग और शांति के विकास का एक महत्त्वपूर्ण साधन हैं।' 1977 में अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद ने इसे पहली बार सेलिब्रेट किया था। संग्रहालय हमारे इतिहास को संरक्षित करने का जरिया हैं। यदि हम आगे बढऩा, उन्नति करना और समाज को समझना चाहते हैं तो इतिहास को समझना भी महत्त्वपूर्ण है। आज जयपुर के कुछ प्रसिद्ध संग्रहालयों के जिम्मेदारों से जानएि जयपुर में म्यूजियम कल्चर को लेकर उनका क्या विजन है।

10-12 वर्षों में लोगों का संग्रहालयों के प्रति रुझान बढ़ा
शहर के सबसे पुराने संग्रहालय, अल्बर्ट हॉल म्यूजियम के निरीक्षक राकेश छोलक ने बताया, 'म्यूजियम किसी भी कला वस्तु या सभ्यता को सहेज के रखने के लिए क्लासरूम की तरह है। स्थानीय आर्ट और कल्चर को संरक्षित करने का यह महत्त्वपूर्ण साधन है। कोरोना से पहले जयपुर समेत पूरे राजस्थन में म्यूजियम कल्चर बहुत ज्यादा ट्रेंड नहीं कर रहा था। लेकिन मैंने महसूस किया है कि बीते 10-12 वर्षों में लोगों का संग्रहालयों के प्रति रुझान बढ़ा है। न केवल यहां लोग घूमने के लिए आते हैं, बल्कि सकॉलर भी अपनी रिसर्च के लिए आते हैं। अल्बर्ट हॉल राजस्थान का पहला म्यूजियम है। बीते वर्षों में अल्बर्ट हॉल आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। 2018 में कोरोना से पहले करीब 7 लाख, 4 हजार ट्यूरिस््टस ने यहां कदम रखें, लेकिन 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 9 लाख, 22 हजार हो गई। आंकड़े साबित करते हैं कि लोगों का म्यूजियम्स की तरफ रुझान बढ़ा है। म्यूजियम के क्षेत्र में बहुत तेजी से बदलाव आ रहे हैं। म्यूजियोलॉजी अब एक वाइड सब्जेक्ट हो गया है। हमें भी जमाने के हिसाब से कदम मिलाने होंगे। यही वजह है कि आकर्षण बढ़ाने के लिए हमने इसमें 2008 व 2018 में रेनोवेशन कर नया रंग-रूप दिया। पूरे देश में सात संग्रहालयों में ही ममी है। लेकिन मिस्त्र के विशेषज्ञों के अनुसार जयपुर की 2300 साल पुरानी ३२२ ईसा पूर्व की 'टु टु' ममी सबसे अच्छे तरीके से संरक्षित की गई है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रेजेंटेशन से भी फुटफॉल बढ़ा है। हमारी योजना है कि हम अल्बर्ट हॉल में ग्राफिक्स का भी इस्तेमाल करें। कोलकाता, बड़ौदा, बनारस, लखनऊ, गोवा और जयपुर समेत पूरे देश में सात जगह ममियां हैं।


नए प्रयोग करना वक्त की जरुरत
नए प्रयोग करना वक्त की जरुरत प्रदेश को पहला वैक्स म्यूजियम देने वाले अनूप श्रीवास्तव का कहना है, 'ट्यूरिज्म की दृष्टि से राजस्थान बहुत ही ब्लेस्ड स्टेट है। कुदरती संसाधन, पर्वत मालाएं, किले, महल और पुरा महत्त्व के मंदिर एवं बावडिय़ां राजसथान के ट्यूरिज्म की खासियत है। इन्हें और विकसित करने की जरूरत है। राजस्थान के स्मारकों, किलों और महलों को सांस लेता हुआ यानी लाइव दिखाए जाने की सख्त जरुरत है। ट्यूरिस्ट कुछ नया चाहता है। पुतलां, डेकोर और पुराने दौर को फिर से जीवंत करने से ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। जयपुर में हर साल करीब 20 लाख से ज्यादा देशी-विदेशी सैलानी आते हैं, जो नया एक्सपीरिएंस चाहते हैं। जब तक हम अपने म्यूजियम को जयपुर के कल्चर के हिसाब से डवलप नहीं करेंगे, तब तक वह मजा नहीं आएगा। संग्रहालय राजस्थानकी हिस्ट्री, कला, साहित्य, संस्कृति और इतिहास को इंटरेक्टिव तरीके से प्रस्तुत करने चाहिए। म्यूजियम को यादगार अनुभव बनाना बहुत जरूरी है। राजस्थान में म्यूजियम को लेकर बहुत स्कोप है। नए म्यूजियम बनाने की बजाय हमारी विरासत को ही अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के हिसाब से विकसित कर ट्यूरिज्म बढ़ाया जा सकता है। मसलन, अगर हम किसी समारक या संग्रहालय के कुछ हिस्सों को लाइव कर दें, तो उसमें जीवंतता आ जाएगी। मैं सिसोधिया रानी गार्डन को लेकर एक परियोजना पर विचार कर रहा हूं, ताकि वहां कि विरासत को सैलानियों से जोड़ा जा सके। तकनीक का इस्तेमाल भी बहुत जरूरी है।


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