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विश्व दृष्टि दिवस: स्यूडोमोनास वायरस के फैलने से 18 लोगों की आंखों की रोशनी पर संकट

सवाई मानसिंह अस्पताल के चरक भवन में स्यूडोमोनास वायरस के फैलने से ऑपरेशन के बाद गायब हुई 18 लोगों की आंखों की रोशनी तीन माह बाद भी वापस नहीं लौटी पायी है।

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जयपुर। सवाई मानसिंह अस्पताल के चरक भवन में स्यूडोमोनास वायरस के फैलने से ऑपरेशन के बाद गायब हुई 18 लोगों की आंखों की रोशनी तीन माह बाद भी वापस नहीं लौटी पायी है। जिससे उन्हें न केवल शारीरिक व मानसिक कष्ट भुगतना पड़ रहा है बल्कि आर्थिक मार से भी जूझना पड़ रहा है। साथ ही उनके परिवार पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

सरकार ने भी उन्हें बिसरा दिया है। पत्रिका से बातचीत में पीड़ितों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन नहीं करवाते तो ही अच्छा रहता। घटना समय अस्पताल में चिकित्सा मंत्री, चिकित्सा विभाग की एसीएस समेत अन्य अधिकारी पहुंचे थे। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक मदद या मुआवजा नहीं मिला।

नहीं ढूंढ पाए कैसे फैला वायरस : जून में 70 से ज्यादा मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए थे। जिनमें 18 मरीजों के स्यूडोमोनास वायरस की चपेट में आने की पुष्टि हुई थी। इसके फैलने का पता लगाने के लिए ऑपरेशन थियेटर बंद किए गए थे। उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई थी। लेकिन अभी तक ये पता नहीं चल पाया कि ये वायरस कैसे फैला। गनीमत रही यह काबू में आ गया है।

अब दूसरी आंख से भी नहीं दिखता, किसे लगाऊं गुहार
गोविंदपुरा कालवाड़ रोड निवासी पीड़ित चंद्रसिंह ने बताया कि उसकी दोनों आंख में मोतियांबिंद हो गया था। अस्पताल गए तब डॉक्टर ने 27 मई को एक आंख का ऑपरेशन कर दिया। अगले दिन पता चला कि, वह भी स्यूडोमोनास वायरस की चपेट में आ गया। डेढ़ महीने अस्पताल में रहा फिर भी रोशनी नहीं लौटी। अब दूसरी से भी दिखना बंद हो गया। किराए में डेयरी बूथ चलाता था। वो भी बंद हो गया है। दूसरी आंख का ऑपरेशन करवाने में भी डर लग रहा है। उन्होंने कहा कि रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। अब किससे हाथ जोड़कर गुहार लगाऊं?, कौन सुनेगा?

रोजगार छूटा, चारमहीने से कमरे में बंद
चित्रकूट निवासी 60 वर्षीय पीड़ित रघुवीर प्रसाद ने बताया कि ऑपरेशन के लिए खैरथल से यहां आया। सोचा था ऑपरेशन के बाद दो तीन दिन में लौट जाऊंगा। अब रोजगर छूट गया। चार माह से यही कमरे में बंद हूं।