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जानिए कितनी सैलरी मिलती है जिला प्रमुख और प्रधान को?

चुनाव प्रचार में मोटी रकम खर्च करके जिला परिषद व पंचायत समिति के वार्डों में चुनाव लड़ते वाले प्रत्याशियों को निर्वाचित होने के बाद सरकार की ओर से कोई मासिक भत्ता नहीं मिलता है।

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चौमूं/पत्रिका। चुनाव प्रचार में मोटी रकम खर्च करके जिला परिषद व पंचायत समिति के वार्डों में चुनाव लड़ते वाले प्रत्याशियों को निर्वाचित होने के बाद सरकार की ओर से कोई मासिक भत्ता नहीं मिलता है। सिर्फ जिला प्रमुख को दस हजार और प्रधान को सात हजार मासिक भत्ता मिलता है। सदस्यों को सिर्फ बैठक भत्ता ही मिलता है।

जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार व राज्य सरकार की ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं की क्रियान्विति जिला परिषद व पंचायत समिति, ग्राम पंचायत के माध्यम से करवाती है। हालांकि केन्द्र सरकार का बजट 100 फीसदी सीधे तौर पर ग्राम पंचायत के खाते में आता है, जबकि राज्य सरकार से मिलने वाले बजट की 100 में से 85 प्रतिशत राशि ग्राम पंचायत में, 10 प्रतिशत पंचायत समिति और 5 प्रतिशत राशि जिला परिषद को विकास के लिए आवंटित होती है, लेकिन हर योजना की क्रियान्विति जिला परिषद से ग्राम पंचायत तक जुड़ी हुई है।

बैठकों में जनता के मुद्दे उठा सकते हैं

पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य साधारण सभा की बैठकों में जनता से जुड़े मुद्दों, सड़क, पेयजल, बिजली, सिंचाई, फसल और स्वास्थ्य सेवाओं एवं अन्य संबंधित मामले उठा सकते हैं। विभागीय अधिकारियों को समस्या-समाधान की मांग कर सकते हैं।

अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं

चूंकि जिला प्रमुख को जिला परिषद सदस्य और प्रधान को पंचायत समिति सदस्य चुनते हैं। इसलिए दोनों जगह के सदस्य प्रमुख व उप प्रमुख व प्रधान व उप प्रधान के खिलाफ उनकी कार्यशैली से असंतुष्ट होने पर अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। जिला प्रमुख व प्रधान की अनुपस्थिति में जिला उप प्रमुख व उप प्रधान अध्यक्षता करेंगे।

एक लाख की सहायता दे सकेंगे
जिला प्रमुख के पास तीन माह में कम से कम एक बैठक आयोजित करने और प्रशासनिक नियंत्रण करने का अधिकार रहेगा। आपदा में किसी एक साल एक लाख तक तत्काल सहायता भी दे सकेंगे। जिले में चरागाह, बंजर भूमि और रिक्त भूमि का प्रबंध पंचायत को सौंपेंगे। इसके अलावा स्कूल खुलवाने, स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार कराने, सड़क और पेयजल आदि का निस्तारण करवाने में सक्षम है।

इनका कहना है
पंचायत समिति और जिला परिषद पंचायत राज की प्रमुख संस्था हैं। इनमें निर्वाचित होकर आने वाले सदस्यों को बैठक भत्ता मिलता है। जिला प्रमुख व प्रधान का मासिक भत्ता देय है। दोनों ही जनप्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर विकास कराने में सक्षम है।
विष्णु गोयल, एसीईओए जिला परिषद जयपुर