
पिता के साथ अपनी सफलता साझा करते रक्षा शर्मा
जैसलमेर. फादर्स डे केवल शुभकामनाओं का अवसर नहीं, बल्कि उन पिताओं के संघर्ष, त्याग और समर्पण को याद करने का दिन भी है, जिनकी मेहनत बच्चों की सफलता की मजबूत नींव बनती है। जैसलमेर जिले में ऐसे अनेक पिता हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों, आर्थिक चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने बच्चों की शिक्षा और सपनों से कभी समझौता नहीं किया। आज उन्हीं संघर्षों का परिणाम है कि मरुधरा की संतानें प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। पोकरण के रामपुरिया गांव और रामदेवरा की दो प्रेरक कहानियां बताती हैं कि जब पिता अपने बच्चों के सपनों को अपना लक्ष्य बना लेते हैं, तब परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक पातीं।
पोकरण उपखंड की खेलाणा ग्राम पंचायत के रामपुरिया गांव निवासी वीरेन्द्र चारण ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) परीक्षा-2024 में प्रदेश में दूसरी रैंक प्राप्त कर पूरे जिले का गौरव बढ़ाया। इस सफलता के पीछे उनके पिता जेठूदान चारण का वर्षों का संघर्ष और अनुशासन छिपा है। राजस्थान पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत जेठूदान वर्तमान में रामगढ़ में सीआईडी बीआइ शाखा में सेवाएं दे रहे हैं। व्यस्त और तनावपूर्ण नौकरी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल बनाया। कभी आर्थिक या पारिवारिक जिम्मेदारियों को बेटे के लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया। वीरेन्द्र बताते हैं कि उन्होंने प्रतिदिन 13 से 14 घंटे अध्ययन किया, लेकिन सफलता का वास्तविक श्रेय पिता के अनुशासन, प्रेरणा और विश्वास को जाता है। उनका कहना है कि पुलिस की वर्दी में दिखने वाला अनुशासन ही घर का संस्कार बना और उसी ने उन्हें लक्ष्य से भटकने नहीं दिया। फादर्स डे पर इससे बड़ा उपहार उनके लिए कुछ नहीं कि उनकी सफलता से पिता का सिर गर्व से ऊंचा हुआ।
रामदेवरा की रक्षा शर्मा की सफलता भी संघर्ष और संकल्प की मिसाल है। एक साधारण टैक्सी चालक की बेटी रक्षा ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा म अधिकारी बनने का सपना साकार किया। उनके पिता मदन शर्मा स्वयं आठवीं कक्षा तक ही पढ़ पाए, लेकिन उन्होंने बेटी की शिक्षा को कभी आर्थिक तंगी के कारण रुकने नहीं दिया। घर में पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं। एक ही कमरे में पूरा परिवार रहता था और वहीं रक्षा पढ़ाई करती थीं। बेटी की पढ़ाई जारी रहे, इसके लिए मदन शर्मा ने कर्ज लिया। आज भी वे टैक्सी चलाकर उस कर्ज का ब्याज चुका रहे हैं, लेकिन उन्हें इस संघर्ष का कोई मलाल नहीं। उनका कहना है कि बेटी की सफलता ही उनकी सबसे बड़ी कमाई है। रक्षा मानती हैं कि यदि पिता ने हर कठिन समय में उनका साथ नहीं दिया होता, तो यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था।
Updated on:
20 Jun 2026 08:42 pm
Published on:
20 Jun 2026 08:41 pm
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