7 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan: राजस्थान के इस जिले में 31 जुलाई तक बंद रहेंगे 1650 से अधिक स्कूल, जानिए इसकी वजह

एक आदेश के अनुसार 29 से 31 जुलाई तक जिले के सभी 1650 से अधिक सरकारी व निजी विद्यालयों और समस्त आंगनवाड़ी केंद्रों में शिक्षण कार्य बंद रहेगा।

2 min read
Google source verification
school student dies in Jaisalmer
Play video

जैसलमेर स्कूल हादसा। फाइल फोटो- पत्रिका

राजस्थान के जैसलमेर के पूनमनगर गांव में सोमवार को विद्यालय का प्रवेश द्वार गिरने से 7 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद जिला प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए जिले के सभी विद्यालयों व आंगनबाड़ी केन्द्रों को तीन दिन के लिए बंद रखने के निर्देश दिए हैं। यह निर्णय मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी की अनुशंसा के बाद लिया गया।

आदेश के अनुसार 29 से 31 जुलाई तक जिले के सभी 1650 से अधिक सरकारी व निजी विद्यालयों और समस्त आंगनवाड़ी केंद्रों में शिक्षण कार्य बंद रहेगा। इस अवधि में सभी शिक्षण भवनों की तकनीकी टीमों द्वारा सुरक्षा जांच कराई जाएगी और संबंधित विभागों को जांच समयबद्ध रूप से पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

कार्यवाहक प्रधानाचार्य निलंबित

इधर, हादसे के बाद विद्यालय की कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुमन बाला को निलंबित कर बीकानेर मुख्यालय किया गया है। ग्रामीणों ने इस निलंबन का विरोध करते हुए उन्हें बहाल करने की मांग की। साथ ही मृतक अरबाज के परिवार को 10 लाख मुआवजा व एक सदस्य को संविदा नौकरी देने की भी मांग रखी।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने जताई संवेदना

पुनमनगर हाबूर गांव के राजकीय बालिका विद्यालय में गेट का पिलर गिरने से छात्र अरबाज की मौत और शिक्षक सहित एक अन्य छात्र के घायल होने की घटना को लेकर कांग्रेस जिला अध्यक्ष उम्मेदसिंह तंवर ने सोमवार को गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने घटना स्थल का भी निरीक्षण किया और परिवार को ढांढस बंधाया। तंवर ने सरकार से मांग की कि इस हादसे में पीड़ित परिवार को भी वही सहायता मिले, जो झालावाड़ स्कूल हादसे के पीड़ितों को दी गई थी।

यह वीडियो भी देखें

गरीबी से जूझ रहा है परिवार

तंवर ने कहा कि मृतक छात्र अरबाज मांगणियार (मीरासी) समुदाय से था। यह समुदाय आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। अरबाज के पिता का निधन पहले ही हो चुका है। ऐसे में इस परिवार को अधिकतम सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवार को दस लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाए और एक सदस्य को सरकारी या संविदा नौकरी मिले।