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Jaisalmer: रेत के बाद रणभूमि दिला रही जैसलमेर को नई पर्यटन पहचान

जैसलमेर अब केवल स्वर्णनगरी और रेगिस्तानी पर्यटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सैन्य पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। भारत-पाक सीमा पर स्थित लोंगेवाला युद्धस्थल 1971 के युद्ध के शौर्य, रणनीति और इतिहास को जीवंत अनुभव के रूप में पर्यटकों तक पहुंचा रहा है। इसके साथ ही जिले का पर्यटन शहर और सम से आगे बढ़कर तनोट-लोंगेवाला तक विस्तार पा रहा है।
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जैसलमेर. लोंगेवाला में स्थित युद्ध संग्रहालय। 

जैसलमेर. सरहदी जिले की पहचान लंबे समय तक सोनार किला, सम के धोरों और रेगिस्तानी संस्कृति तक सीमित रही। अब भारत-पाक सीमा पर स्थित लोंगेवाला युद्धस्थल जैसलमेर को एक नई पहचान दे रहा है—सैन्य पर्यटन की राजधानी। यहां आने वाले पर्यटक केवल स्मारक नहीं देखते, बल्कि उस रणभूमि पर खड़े होकर 1971 के युद्ध की रणनीति, भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और निर्णायक नेतृत्व को महसूस करते हैं। उक्त बदलाव केवल पर्यटन का नहीं, बल्कि पर्यटन की सोच का भी है। पहले लोग जगह देखने आते थे, अब कहानी जीने आते हैं। जानकारों के अनुसार पर्यटन उद्योग तेजी से 'एक्सपीरियंस इकोनॉमी' की ओर बढ़ रहा है। आज का पर्यटक ऐसी जगह चाहता है जहां इतिहास, तकनीक और भावनाएं एक साथ मिलें। इसी कारण युद्धस्थल, विरासत संग्रहालय और सैन्य स्मारक नई पीढ़ी के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। सैन्य पर्यटन ने जैसलमेर की पर्यटन अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ा दिया है। पहले अधिकांश पर्यटक शहर और सम तक सीमित रहते थे, अब यात्रा का दायरा तनोट और लोंगेवाला तक पहुंच रहा है।

सैन्य पर्यटन के आगे बढ़ने के कारण

-देशभक्ति से जुड़ा अनुभव

-वास्तविक युद्धस्थल देखने का अवसर।

-डिजिटल और इंटरएक्टिव संग्रहालय।

-स्कूल-कॉलेजों के शैक्षणिक भ्रमण।

-सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता।

-जैसलमेर को मिल रहा डबल फायदा

यूं दिख रहा सीधा असर

-पर्यटकों का ठहराव बढ़ रहा

-टैक्सी और टूर ऑपरेटरों की आय बढ़ी

-सीमा क्षेत्र में छोटे कारोबार सक्रिय हुए

-स्थानीय युवाओं के लिए गाइडिंग के अवसर बढ़े।

-होटल और होम-स्टे को नया ग्राहक वर्ग मिला।

फैक्ट फाइल

-1971 के भारत-पाक युद्ध में लोंगेवाला भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे निर्णायक लड़ाइयों में शामिल है।

-भारत में वर्ष 2023 के दौरान 250 करोड़ से अधिक घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं।

-अनुभव आधारित पर्यटन वैश्विक पर्यटन उद्योग का सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र माना जा रहा है।

-राजस्थान में जैसलमेर पहले से प्रमुख पर्यटन गंतव्य है, अब सीमा पर्यटन इसकी नई ताकत बन रहा है।

सिर्फ संग्रहालय नहीं, 'लिविंग क्लासरूम'

एक्सपर्ट व्यू : घूमने के साथ सीखने और महसूस करने का अनुभव भी बन रहा पर्यटन

अब पर्यटन केवल घूमने का माध्यम नहीं, बल्कि सीखने और महसूस करने का अनुभव बन चुका है। लोंगेवाला इस बदलाव का सबसे प्रभावी उदाहरण है। 1971 का लोंगेवाला युद्ध नेतृत्व, साहस, संसाधनों के कुशल उपयोग और सैन्य रणनीति का विश्वस्तरीय उदाहरण है। यदि इसे आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जाए तो यह एशिया के प्रमुख सैन्य पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।

-अनिल पंडित, पर्यटन विशेषज्ञ