
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन में कई पंचायतों के क्षेत्रों में किए गए बदलावों से संबंधित गांवों के बाशिंदों में विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं। दरअसल, कई गांवों के पंचायत मुख्यालय बदल दिए गए हैं और जो नए ग्राम पंचायत मुख्यालय हैं, वे पहले के मुकाबले कहीं अधिक दूरी पर अवस्थित हैं।
ऐसे में प्रभावित ग्रामीण पंचायतों के गठन में व्याप्त ख्खामियों को दूर करने की मांग कर रहे हैं। शोभ गांव के साथ ऐसा ही वाकया पेश आया है। उनका मुख्यालय 25 किलोमीटर दूर नई बनी पंचायत सोडा कर दिया गया है। जबकि पूर्व में यह 9 किमी की दूरी पर अड़बाला में था। इस गांव में 811 मतदाता हैं। शोभ के ग्रामीणों ने पूर्व में ही उपखंड अधिकारी व विधायक को इस संबंध में ज्ञापन दिया था। ग्रामवासियों ने रोष जताते हुए कलक्टर को ज्ञापन दिया और न्याय की गुहार लगाई है।
ग्रामीण तेजमालसिंह ने बताया कि शोभ में 811 मतदाता हैं और सोडा में 300, इसके बावजूद सोडा को पंचायत मुख्यालय बना दिया गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार पंचायत मुख्यालय शोभ में स्थापित करे या फिर पूर्व की भांति अड़बाला पंचायत में ही रहने दिया जाए। पूर्व सरपंच नारायणपुरी ने कहा कि 811 मतदाता वाले गांव के लोग 300 वोट वाले गांव में वोट देने 25 किमी दूर कतई नहीं नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंचायत मुख्यालय शोभ में किया जाए नहीं तो ग्रामीण मतदान का बहिष्कार करेंगे। अमृतराम ने कहा कि हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ है, हमारे मतदान अधिकार का तिरस्कार हुआ है।
ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन से धऊवा के ग्रामीणों में भी रोष है। सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान जैसलमेर के जिलाध्यक्ष नारायणसिंह पाऊ ने बताया कि ग्राम पंचायत धऊवा में पूर्व में ग्राम विजयनगर, हांसुवा, हसन का गांव, मुंदड़ी, जियाई और मेघवालों की ढाणी शामिल थे। इस बार ग्राम पंचायत धऊवा का पुनर्गठन कर ग्राम माणपिया को शामिल किया गया है। जो धऊवा से वाया जैसलमेर करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर है। उन्होंने बताया कि जबकि विजयनगर गांव धऊवा से सिर्फ 5 किलोमीटर आया हुआ है, उसे सत्ता पंचायत में शामिल किया गया है। हांसुवा गांव को भी सत्ता में शामिल किया गया है। हांसुवा क्षेत्र में बिखरी हुई ढाणियां हैं।
धऊवा से हांसुवा की इन ढाणियों की दूरी 1 से 4 किलोमीटर है। हांसुवा के लोगों में बड़ा रोष है क्योंकि उनका पंचायत मुख्यालय सत्ता किया गया है। जिसकी दूरी करीब 25 किलोमीटर है। नारायणसिंह ने कहा कि ग्रामीण मतदान का बहिष्कार करने की हद तक जा सकते हैं।
Published on:
27 Nov 2025 11:12 pm
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