
Patrika news
पोकरण (जैसलमेर) . पशुओं की पहचान के लिए उनके कान पर टैग लगाए जा रहे हैं। जिससे यह पशु किस पशुपालक का है, इसकी समस्त जानकारी पशुपालन विभाग में मिल सकेगी। सरकार की इस योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में दुधारू पशुओं को पहचान दिए जाने का कार्य शुरू किया गया है। गौरतलब है कि जैसलमेर जिला पशु बाहुल्य क्षेत्र है, यहां लोग ऊंट, गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़ा आदि पशुओं का पालन कर अपना जीवनयापन करते है। क्षेत्र में बारिश नहीं होने व अकाल की स्थिति में लोग अपने पशुओं को जंगल में आवारा छोड़ देते है। आवारा घूमते पशुओं के कारण कई बार दुर्घटनाएं होती है तथा ये पशु लोगों के खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को भी बर्बाद करते है, लेकिन उनकी पहचान नहीं होने के कारण पशु मालिक की भी पहचान नहीं हो पाती है। योजना के अनुसार पशु के साथ पशुपालक की भी पूरी जानकारी विभाग के पास रहेगी।
12 डिजीट का होगा टैग
स्थानीय पशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ.रामजीलाल करोड़ीमल ने बताया कि प्रथम चरण में दुधारू गायों व भैंसों को टैग लगाए जा रहे है। इसके बाद दूसरे चरण में अन्य पशुओं के टैग लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सबसे पहले पशु व उसके मालिक की पूरी जानकारी एक प्रपत्र में दर्ज की जाएगी। जिसके अंतर्गत पशुपालक का नाम, पिता का नाम, पशु की नस्ल, रंग, गांव, पंचायत, तहसील, जिला, मोबाईल नंबर लिए जाएंगे तथा प्रत्येक पशु के कान पर टैग लगाया जाएगा। जिस पर 12 अंक अंकित होंगे। जिससे पशु व उसके मालिक की पहचान हो सकेगी। उन्होंने बताया कि अब तक 100 पशुओं के टैग लगाए जा चुके है।
पशुपालकों को मिलेगा लाभ
पशुओं को पहचान मिलने व उसके कान पर टैग लगने से पशुओं की तस्करी पर भी लगाम लगेगी। इसी प्रकार पशुओं की खरीद फिरोख्त की जानकारी पशुपालन विभाग के पास रहेगी। इससे पशु गणना में सुविधा होगी। किसी पशु में बीमारी फैलने की स्थिति में उसकी तत्काल जांच कर उसके संक्रमण को फैलने से बचाया जा सकेगा तथा उसका रिकॉर्ड भी पशु चिकित्सालय में सुरक्षित रहेगा। एक तहसील व जिले से दूसरे तहसील व जिले में पशुओं के बेचान से पशु गणना में बढोतरी व कटौती हो सकेगी। इसी प्रकार पशुपालकों के पास उपलब्ध पशुओं की संख्या के अनुसार पशुपालन विभाग की ओर से संचालित योजनाओं का लाभ भी उसे दिया जा सकेगा।
Published on:
21 Jan 2018 09:44 pm
बड़ी खबरें
View Allजैसलमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
