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अग्नि को साक्षी मानकर विदेशी युगल लेगा सात जन्म साथ निभाने का संकल्प

-जैसलमर के एक होटल में आयोजन, निमंत्रण पत्र भी छपवाए-वेडिंग ट्यूरिज्म का बढ़ रहा प्रचलन, शाही परंपराओं को लेकर

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अग्नि को साक्षी मानकर विदेशी युगल लेगा सात जन्म साथ निभाने का संकल्प

अग्नि को साक्षी मानकर विदेशी युगल लेगा सात जन्म साथ निभाने का संकल्प

जैसलमेर. स्वर्णनगरी में इन दिनों एक विदेशी युगल के भारतीय रीति रिवास से विवाह समारोह सुर्खियों में हैं। यह विवाह बुधवार को होगा, जिसमें ईटली से आया युगल अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेगा और सात जन्म साथ निभाने का संकल्प लेगा। इस अनूठे विवाह समारोह को लेकर निमंत्रण कार्ड छपवाकर निमंत्रण भी भेजे गए हैं। आयोजक अशरफ अली की मानें तो इटली निवासी मतिया एस्पोसीतो अपनी पत्नी एलिन सोफिया मेडेलीन बोमग्रेन के साथ यहां सात फेरे लेंगे। अशरफ अली यहां बधू पक्ष के भाई बनकर रीति-रिवाजों का निर्वहन करेंगे। उन्होंने एलिन को कविशा नाम भी दिया है। अब तक प्री-वेडिंग, महिला संगीत व अन्य रस्में हो चुकी है।
विवाह को लेकर उत्साहित युगल
दुल्हन कविशा को थोड़ी हिंदी बोलनी भी आती है और वह हिंदी समझ भी लेती है। उनके पति मतिया पेशे से संगीतकार है। सात समंदर पार धोरों के बीच बसे खूबसूरत जिले के होटल व रेस्टोंट्स में विवाह संबंधी परंपराओं के निर्वहन से विदेशी युगल अभिभूत है।
परम्परा से प्रभावित
जैसलमेर में पिछले दशकों के दौरान विदेशी जोड़े हिंदू परम्परा से प्रभावित होकर बारात निकाल कर और अग्नि के इर्द.िगर्द फेरे लेकर विवाह बंधन में बंधते रहे हैं। शुरू में ऐसे विदेशी जोड़े यहां की होटलों में हिंदू परम्परा और रीति.रिवाजों से प्रभावित होकर शादी करते थे। बाद में धीरे.धीरे यहां की बड़ी होटलों में देश के धनाढ़्य वर्ग ने शादी समारोह आयोजित करने की शुरूआत की। शाही अंदाज वाली शादियों में स्थानीय लोक कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का भी भरपूर मौका मिल रहा है। जैसलमेर ही नहीं राजस्थान भर की मशहूर लोक नृत्य शैलियों में निष्णात कलाकार आयोजन के दौरान अपनी कला का जादू जगाते हैं। बड़े बजट की शादियों में बॉलीवुड या टीवी से जुड़े कलाकार भी प्रस्तुतियां देने पहुंचते रहे हैं। स्टेज परफार्मेंस के लिए अनेक कलाकार बाहर से बुलाए जाते हैं। अमूमन विदेशी युगलों के होने वाले विवाह समारोह राजा-रजवाड़ों के शादी समारोहों पर आधारित हुआ करती है, जिसमें बग्घी पर सवार होकर दूल्हा पहुंचता है और उसके दोनों ओर हाथों में भाले व मशालें थामे लोग चलते हैं। इसके अलावा शादी का मंडप भी पुष्पमालाओं तथा लाइटिंग इफेक्ट से प्राचीन माहौल बनाया जाताा है।