
ऐतिहासिक सोनार दुर्ग के भीतर सूरज प्रोल मार्ग पर हर सुबह बनने वाली फिसलन से हादसे की आशंका रहती है। नल से पानी की आपूर्ति शुरू होते ही फर्श पर पानी जमा हो जाता है, जिससे करीब 30 मिनट तक रास्ता जोखिम भरा बना रहता है। इस दौरान रोजाना लगभग 500 लोग प्रभावित होते हैं, जिनमें स्थानीय निवासी, मंदिरों में आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक शामिल हैं। समस्या का कारण फर्श के नीचे पाइप लाइन में लंबे समय से हो रहा लीकेज है। पानी रिसकर ऊपर आता है और घाटी की चिकनी सतह पर फैलते ही मार्ग फिसलन भरा हो जाता है। दुर्गवासी और लक्ष्मीनाथ मंदिर व बाबा रामदेव मंदिर जाने वाले श्रद्धालु कपड़े बचाते हुए सावधानी से निकलते हैं, लेकिन जोखिम बना रहता है।
सोनार किले में सुबह नल आपूर्ति शुरू होते ही पानी लीकेज होने लगता है। करीब 30 मिनट तक फिसलन की स्थिति बनी रहती है। इस दौरान रोजाना आवागमन प्रभावित होता हैं।
सबसे अधिक परेशानी उस समय होती है, जब बच्चों के स्कूल जाने का समय और श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का समय एक साथ होता है। घाटी में कई बार भीड़ और फिसलन मिलकर हालात को और खतरनाक बना देती है। कई बार दुपहिया वाहन चालक संतुलन खो चुके हैं। राहत की बात यह है कि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन स्थिति लगातार चेतावनी दे रही है। पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद ही धीरे-धीरे हालात सामान्य होते हैं। पानी सूखने के बाद ही आवागमन सुचारु हो पाता है, तब तक लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
हर सुबह पानी भर जाने से रास्ता बेहद फिसलन भरा हो जाता है। कई बार खुद भी संतुलन बिगड़ चुका है। यह समस्या नई नहीं, लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन कोई समाधान नजर नहीं आता। क्षेत्रवासियों के अनुसार जिम्मेदारों को मौके पर आकर स्थिति देखनी चाहिए और तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि यहां हर दिन हादसे का खतरा बना रहता है।
— पुखराज, स्थानीय निवासी
मंदिर जाने के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कपड़े बचाने के चक्कर में कदम संभालकर रखना पड़ता है। कई बुजुर्ग और महिलाएं यहां फिसलते-फिसलते बची हैं। यह धार्मिक स्थल का मुख्य मार्ग है, यहां ऐसी स्थिति ठीक नहीं है। अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। व्यवस्था सुधारना बेहद जरूरी हो गया है।
— मीना व्यास, श्रद्धालु
जैसलमेर देखने आए थे, लेकिन इस तरह की परेशानी ने अनुभव खराब कर दिया। रास्ता इतना फिसलन भरा था कि चलना मुश्किल हो गया। विदेशी पर्यटक भी यहां असहज नजर आते हैं। यह जगह विश्व प्रसिद्ध है, ऐसे में बेसिक सुविधाओं का ध्यान रखना जरूरी है। अगर ऐसी समस्याएं बनी रहीं तो पर्यटन छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
— रोहण शर्मा, पर्यटक
दुपहिया वाहन चालक ज्यादा प्रभावित होते हैं। हर दिन यह स्थिति बनती है, फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। यह लापरवाही सीधे-सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ी है। अगर अब भी ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। जिम्मेदारों को इसको गंभीरता से लेना चाहिए।
— ललित गोपा, स्थानीय निवासी
Published on:
14 Apr 2026 07:52 pm
बड़ी खबरें
View Allजैसलमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
