
ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
जैसलमेर जिले में ओरण क्षेत्र की जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग को लेकर बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट पर ग्रामीणों ने जोरदार ढंग से प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां थामे ओरण बचाओ आंदोलन में शामिल लोगों ने कलेक्ट्रेट पर नारेबाजी की और काफी देर तक धरना देने के बाद अतिरिक्त जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ओरण क्षेत्र की जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग की और निजी कंपनियों को ओरण भूमियों के आवंटन का विरोध किया गया। इससे पहले राघवा गांव से दो दिन पहले रवाना हुई ओरण बचाओ पदयात्रा बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंची। बाद में सभी लोग हनुमान चौराहा से कलेक्ट्रेट तक जुलूस की शक्ल में पहुंचे। इस मौके पर कलेक्ट्रेट के भीतर व बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के दरवाजे बंद होने पर वहां खड़े रहकर विरोध का इजहार किया। तत्पश्चात उन्हें भीतर आने दिया गया।
उग्र आंदोलन की चेतावनी दी
कलेक्टे्रट पहुंचे लोगों ने कहा कि अगर ओरण की जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर भाजपा नेता सुनीता भाटी ने कहा कि जिले की जमीनें बड़े पैमाने पर सेना, बीएसएफ, एयरफोर्स आदि को देने के साथ सोलर-विंड संयंत्रों के बाद अब सीमेंट कम्पनियों को दी जा रही है। ऐसे में यहां का किसान और आमजन कहां जाएगा? हमें विस्थापित किया जा रहा है। इस मौके पर मौजूद भाजपा व कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया। पर्यावरण प्रेमी सुमेरङ्क्षसह सांवता ने कहा कि, हमारी एक ही मांग है, ओरण की जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, जिससे वह सारी जमीनें संरक्षित हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया गया और यह जमीनें कम्पनियों को दी गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। गौरतलब है कि राघवा से जैसलमेर तक पदयात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय तक का सफर पैदल तय किया और ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग की। गौरतलब है कि राघवा गांव के मिठड़ाऊ कुंआ, कालरा कुंआ व जुनिया कुंआ पर भुराबाबा, सिद्ध हनवंतसिंह, जुझार श्यामसिंह, वीर सिद्धराव मायथीजी, खेजड़ वाली माता व जुझार कुंपसिंह की प्राचीन सामाजिक मान्यताओं और परंपराओं से छोड़ी गई ओरण भूमि व मुंहबोली ओरण भूमि है। ग्रामीणों ने बताया कि ये 25 हजार बीघा से भी ज्यादा जमीन है जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। सरकार इसे ओरण के नाम से ही राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करे।
Published on:
28 Feb 2024 09:14 pm
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