
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पश्चिमी मरुस्थल का आकाश शुक्रवार शाम युद्धक गर्जना से गूंज उठा। करीब दो वर्ष बाद मरुस्थल के विस्तृत आकाश ने फिर उन क्षणों को देखा, जब हिन्द के वायु योद्धाओं ने साहस, शौर्य और पराक्रम के संगठित स्वर में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
वायुशक्ति-2026 युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना की सामरिक, रणनीतिक और तकनीकी दक्षता का सजीव घोष देखने को मिला। निर्धारित समय शाम 5:17 बजे शुरू हुए इस डे-नाइट अभ्यास ने संध्या से रात तक मरुस्थल को गूंजता रण क्षेत्र बना दिया। धमाकों, मिसाइल प्रहारों और सटीक बमबारी ने वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति पैदा की। करीब दो घंटे तक चले उक्त प्रदर्शन ने दिन का उजास, रेगिस्तान की उड़ती धूल और रात के अंधकार—तीनों पर समान अधिकार स्थापित करते हुए चौबीसों घंटे संचालन क्षमता का प्रमाण दिया। काउंटर सरफेस फोर्सेज, ऑपरेशन सर्च, एयर डिफेंस सिस्टम और रेस्क्यू मिशनों का तालमेल ‘ऑन टाइम, ऑन टारगेट, एवरी टाइम’ का सजीव उदाहरण बना। राष्ट्रपति द्रौपदी मुुर्मु, रक्षामंत्री राजनाथसिंह, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत, एयर चीफ मार्शल एपीसिंह सहित कई सैन्य सेवाओं से जुड़े अधिकारी इस ऐतिहासिक युद्धाभ्यास के साक्षी बने।
अभ्यास का आरंभ राफेल की सुपरसोनिक गर्जना से हुआ। ध्वनि तरंगों ने जैसे रणक्षेत्र को चेताया कि निर्णायक समय आरंभ हो चुका है। सुखोई-30 एमकेआई ने दुश्मन के रनवे और ठिकानों पर 44 बमों की सटीक वर्षा कर वायु प्रभुत्व स्थापित किया। मिराज-2000, मिग-29, जगुआर और हॉक ने लक्ष्यों पर रॉकेट, लेजर गाइडेड बम और मिसाइलों से प्रहार किया। कुल 277 हथियारों के प्रयोग से करीब 12 हजार किलोग्राम विस्फोटक क्षमता प्रदर्शित की गई।
युद्धाभ्यास में 77 लड़ाकू जेट, 43 हेलिकॉप्टर और 8 परिवहन विमान शामिल थे, जो एकीकृत लय में संचालित हुए। अपाचे और एलसीएच प्रचंड ने अग्रिम मोर्चों पर आक्रामकता दिखाई। चिनूक ने एम-777 होवित्जर तोप लेकर सामरिक गतिशीलता साबित की, जबकि एमआई-17 और एएलएच ने सैनिक तैनाती और बचाव अभियानों का शानदार प्रदर्शन किया। गरुड़ कमांडो दल ने हेलीकॉप्टर से उतरकर आतंकी ठिकानों को मुक्त कराने की जीवंत कार्रवाई दिखाई। सी-130 व सी-295 ने रात्रि असॉल्ट लैंडिंग की। स्वदेशी आकाश और समर मिसाइलों ने सतह से हवा में मार कर शत्रु प्रयासों को विफल किया। एस-400 ने अभेद्य सुरक्षा कवच का संकेत दिया।
इस बार का विशेष आकर्षण ड्रोन शो था। मरुस्थल के आकाश में प्रकाश बिंदुओं ने भारत का मानचित्र उकेरा और 1965 के सरगोधा अभियान, कारगिल के टाइगर हिल, बालाकोट एयर स्ट्राइक तथा ऑपरेशन सिंदूर की वीर गाथा को दृश्य रूप दिया।
Updated on:
27 Feb 2026 09:25 pm
Published on:
27 Feb 2026 09:24 pm
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