
थार की रेत में बसी जैसलमेर की शाम इन दिनों देवी आराधना से सराबोर हैं। मंदिरों की घंटियां, मंत्रों की गूंज और दीपों की आभा अब केवल मंदिर की चौखट तक सीमित नहीं रही। इंटरनेट की तरंगों के सहारे यह आस्था देश-विदेश में बसे प्रवासियों तक पहुंच रही है। जगमगाते आरती स्थल से निकली रोशनी अब डिजिटल स्क्रीन पर भी चमक रही है, जिससे श्रद्धा का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है।
व्यापारी गजानन सारस्वत बताते हैं कि - दुबई में बैठा हूं, पर जब मोबाइल फोन की स्क्रीन पर आरती देखता हूं तो लगता है मानो जैसलमेर की हवाओं में ही सांस ले रहा हूं। यह मेरे लिए घर की खुशबू है।
छात्रा रीना पूनमचंदानी बताती है कि व्यस्तताओं के बीच मंदिर नहीं जा सकी, लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर आरती ने दूरी को पाट दिया। यह नवरात्र मेरे लिए यादगार बन रहा है।
आइटी प्रोफेशनल आशीष थानवी बताते है कि हैशटैग पर युवाओं की आस्था उमड़ती देख लगता है कि सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन नहीं, भक्ति का भी माध्यम बन गया है।
गृहणी सुमन देवी के अनुसार बुजुर्ग माता-पिता मंदिर नहीं जा सके, पर स्क्रीन पर जब उन्होंने आरती देखी तो उनकी आंखें भर आईं। यह तकनीक सचमुच ईश्वर का ही वरदान लगती है।
धार्मिक संस्कृति पर शोधकर्ता डॉ. अशोक शर्मा कहते हैं जैसलमेर की यह पहल केवल तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का डिजिटल पुनर्जन्म है। हालांकि यह ध्यान रखना होगा कि प्रत्यक्ष भक्ति का अनुभव अनमोल है और स्क्रीन केवल उसका विस्तार हो सकती है, विकल्प नहीं।
Updated on:
24 Sept 2025 08:44 pm
Published on:
24 Sept 2025 10:39 pm
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