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लोक कलाकार दप्पू खान को पुण्यतिथि पर प्रशंसकों ने याद किया

लोक कलाकार दप्पू खान को पुण्यतिथि पर प्रशंसकों ने याद किया

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लोक कलाकार दप्पू खान को पुण्यतिथि पर प्रशंसकों ने याद किया

लोक कलाकार दप्पू खान को पुण्यतिथि पर प्रशंसकों ने याद किया

जैसलमेर. जैसलमेर के विख्यात लोक कलाकार दप्पू खान की पहली पुण्यतिथि पर जैसलमेर के पर्यटन व्यवसायियों और उनके प्रशंसकों तन सिंह, अशरफ अली और कूम्पसिंह लौद्रवा ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने दप्पू खा की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान दप्पू खान के पुत्र रिद्धू खान ने उनका प्रसिद्ध गीत मूमल सुनाया। अशरफ अली ने बताया कि दप्पू खान जैसलमेर की पहचान थे। वे सोनार किला, गड़ीसर लेक आदि पर्यटन स्थानों पर बैठकर मूमल के साथ साथ कई लोकगीत गाते थे। कमायचा के वे असली कलाकार थे। उनके निधन से जैसलमेर के पर्यटन और लोक संगीत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। कूम्पसिंह लौद्रवा ने कहा कि ऐसे कलाकार बिरले ही पैदा होते हैं। इस मिट्टी के कलाकार दप्पू खान को सरकार की ओर से मरणोपरांत सम्मान जरूर दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर उनके पुत्र रिद्धू को भेंट की। इस अवसर पर बताया गया कि आगामी दिनों में दप्पू खान की याद में संगीत संध्या का आयोजन किया जाएगा। रिद्धू खान ने पिता को याद करते हुए उनके गाए गीतों को सुनाकर भाव विभोर कर दिया। श्रद्धांजलि सभा में सवाईराम सुथार, तनसिंह, राजू कुमार, सवाई सुथार, प्रतीश चांडक, प्रेमसिंह गोगली, सवाई दान, लतीफ खान, जेम्स, शौकत और बरियम आदि मौजूद थे।

प्रभात फेरी निकाल दिया शांति-अहिंसा का संदेश
जैसलमेर। महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति जैसलमेर की ओर से शुरू की गई प्रभात फेरी कार्यक्रम रविवार को भी जारी रहा। समिति के सहसंयोजक रूपचंद सोनी ने बताया कि प्रभात फेरी के माध्यम से शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से समिति संयोजक उम्मेदसिंह तंवर के मार्गदर्शन में प्रभात फेरी कार्यक्रम शुरू किए गए। इसी कड़ी में रविवार को प्रभात फेरी कार्यक्रम हुआ जिसमें शान्ति, सद्भावना, अहिंसा के साथ देश की एकता व अखंडता के लिए जय जगत, रामधुन, उठ जाग मुसाफिर भोर भई... गीतो का गायन किया गया। इसमें देवकाराम माली, राधेश्याम कल्ला, शंकरसिंह करड़ा, जाकिर हुसैन चड़वा, रूपचंद सोनी, भरत श्रीमाली, दिलीप सिंह सोलंकी, प्रेम भार्गव, जयसिंह परिहार, वीरेंद्र मेघवाल, नेमीचंद भार्गव, कालूराम ओड, राजू व घनश्याम माली ने हिस्सा लिया।