
सीमांत जिले से वन्यजीव प्रेमियों के लिए दो खुश खबरें एक साथ आई हैं। सम क्षेत्र के सुदासरी स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में टोनी और शार्की नामक मादा गोडावण के दिए अंडों से नन्हें चूजे निकले हैं, जिन्हें विशेषज्ञों की देखभाल में रखा गया है और वे दोनों स्वस्थ हैं। दूसरी तरफ डीएनपी के सुदासरी क्षेत्र में हाल में दो नन्हें गोडावण भी देखे गए हैं। इनमें से एक को स्वयं उप वन संरक्षक ने देखा और दूसरा स्टाफ सदस्य ने देखा है। इस तरह से जिले के सम व रामदेवरा स्थित दोनों ब्रीडिंग सेंटरों में गोडावण की संख्या बढ़ कर 36 हो गई है। ये चूजे कैप्टिव ब्रीडिंग से हुएं है। जिसका मतलब यह होता है कि गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में पल रहे नर व मादा गोडावण के संयोग से अंडा देना होता है। इन्हें जन्म देने वाली मादा शार्की व टोनी कैप्टिव-पालित हैं।
जानकारी के अनुसार डीएनपी के सुदासरी और रामदेवरा फील्ड में अभी तक लुप्तप्राय: और दुर्लभ श्रेणी में शामिल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के 6 अंडे देखे गए हैं। इनमें से ब्रीडिंग सेंटर में हैचिंग के लिए अभी तक एक ही अंडा उठाया गया है। शेष पांच अंडों को प्राकृतिक ढंग से चूजों के जन्म लेने के लिए रखने दिया गया है। इन अंडों की डीएनपी के फील्ड स्टाफ की ओर से मोनेटरिंग की जा रही है। बताया जाता है कि जब मादा गोडावण अंडों को सेती है तब दिन में कम से कम दो-तीन बाद पानी पीने के लिए उन्हें छोड़ जाती हैं, उस समय वहीं आसपास टेंट लगाकर या पेड़ की छांव में बैठने वाला फील्ड कार्मिक अंडे की निगरानी करता है ताकि अंडे को जंगल में बिल्ली या लोमड़ी आदि कोई नुकसान न पहुंचा सके। जानकारों के अनुसार प्राकृतिक रूप से एक अंडे से चूजा निकलने में 25 से 30 दिन का समय लगता है वहीं ब्रीडिंग सेंटर में यह प्रक्रिया 20-22 दिन में पूरी हो जाती है।
Published on:
02 Jun 2024 08:00 am
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