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जैसलमेर/रामगढ़.
पंजाब क्षेत्र के हरिके बैराज के पास इंदिरा गांधी नहर का पटड़ा क्षतिग्रस्त होने के बाद ‘आपातबंदी’ में नहरी पानी को रोकने से सरहदी जैसलमेर जिले के किसानों की सरसों की फसलें बर्बाद होने के कगार पर है। इन्दिरा गांधी नहर परियोजना में हरिके बैराज के नजदीक पटड़े में आया कटाव गत दिनों बढ़ जाने के बाद से सरहदी जैसलमेर जिले के किसानों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। गत 3 दिसंबर को इगांनप का पटड़ाक्षतिग्रस्त हो गया था। जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी पंजाब पहुंचे थे। इसके बाद गत 5 दिसंबर को फिरोजपुर फीडर व इगांनप के बीच पटड़े में आया कटाव बढ़ जाने के बाद से जैसलमेर जिले के किसानों की उम्मीदों पर वज्रपात हो गया है। जानकारों के अनुसार हरिके बैराज के अधिकारियों ने दोनों नहरों का पानी एक होने का खतरा देखते हुए राजस्थान और पंजाब को पानी देने वाली नहरों को तीन दिन के लिए बंद करने का निर्णय लिया था। इधर, सरहदी जैसलमेर जिले के नहरी क्षेत्र में सरसों की फसल नष्ट होने के कगार पर है। किसान बताते हैं कि इस वर्षसाल पोंग डेम में पानी की कमी के कारण नहर विभाग ने सभी किसानों को रबी में कम पानी की फसलें बोने के लिए प्रचार-प्रसार किया था, वहीं किसानों ने भी कम पानी को देखते हुए सरसों,चना, जीरा व ईसब गोल की खेती करना ही मुनासिब समझा। नहर विभाग ने भी किसानो को रबी की फसलों के लिए सिंचाई पानी प्रवाहित करने के लिए सभी नहरों को तीन समूह में बांट कर एक समूह में पानी प्रवाहित करने का चक्रीय कार्यक्रम निर्धारित किया था, लेकिन अभी तक इसके अनुसार दो वरीयता का पानी प्रवाहित किया गया, जिसमें किसानों ंने अक्टू व नवंबर में मिले पानी से सरसों व चने की फसलों की बुवाई की है।
जिम्मेदार जता रहे लाचारी
नहरी क्षेत्र में अगेती बोई गई फसलों में प्रथम पानी की वरीयता वर्तमान में चल रही है, लेकिन नहरी विभाग के उच्चाधिकारियों का कहना है कि इन्दिरा गांधी नहर के पंजाब में क्षतिग्रस्त होने के कारण नहरों में सिंचाई तो दूर पीने का पानी भी प्रवाहित करने में असमर्थ है। जिम्मेदारों के इस जवाब से हजारों हेक्टर में बोई गई सरसों की फसल के जमींदोज होने का खतरा मंडराने लगा है। उधर, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इस साल से प्रारम्भ की गई है, अब अधिकांश किसानों ने अपनी भूमि बैकों में गिरवी रख कर कृषि ऋण ले रखे है, वहीं वर्तमान में नोट बन्दी के चलते किसानो की केसीसी रिनेवल का कार्य बैकों की ओर से नहीं किया जा रहा है। ऋणी किसानों के बीमे की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। अब किसानों को यह डर सता रहा है कि केसीसी का रिनेवल तो हुई नहीं अब सरसों की फसल बर्बाद होने के कगार तक पहुंच गई है। ऐसे में नुकसान झेलने वाली फसलों के नुकसान की भरपाई बीमा कम्पनी करेगी भी या नहीं।
फैक्ट फाइल
-256 किमी लंबी है इन्दिरा गांधी नहर परियोजना की स्टेज द्वितीय
-18 9 किमी से कैनाल शुरू होकर 445 किमी तक है लंबी
-3 दिसंबर को पंजाब में नहर का पटड़ा हो चुका है क्षतिग्रस्त
-5 दिसंबर को क्षतिग्रस्त पटड़े का कटाव में हुई बढ़ोतरी
- 2 राज्यों पंजाब व राजस्थान की नहरों का पानी मिलने से रोकने को किया है बंद
-7 जिले जैसलमेर व बाड़मेर सहित शामिल है नहर के द्वितीय स्टेज में
-1 लाख के करीब किसान जुड़े हुए है नहरीक्षेत्र में कृषि कार्यों से
किसानो की जुबानी-
बिन पानी सब सून
रामगढ क्षेत्र की सभी नहरों की प्रथम वरीयता में बारीबंदी चल रही है, लेकिन नहरी विभाग के अधिकारी पंजाब में नहरा टूटने की बात कह कर नहरो में पानी चलाने में अपनी असर्मथता जता रहे है। ैअब खेतों में हमारी सरसों की फसल बिन पानी बर्बाद हो रहीं हैं।
-मनोज कुमार, किसान पाईप माइनर
नहर विभाग की ओर से नहरों की प्रथम वरीयता में होने के बावजूद पानी नहीं चलाया जा रहा है, जबकि बिना पानी किसानों की ओर से बोई गई सरसों की फसलें पूरी तरह खत्म हो रही हैं। ऐसे में किसानों को समझ में नहीं आ रहा कि वे क्या करें और क्या न करें ?
-रमणलाल किसान डीच माइनर
चला देंगे पानी
पंजाब में नहर के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण हम नहरों में पानी नहीं चला सकते। पानी आने पर प्रथम वरीयता में पीट चुकी बारियों में पानी चला दिया जाएगा
-एचके खरे, अधिशासी अभियंता, रामगढ़
Published on:
17 Dec 2016 09:21 pm
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