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गोडावन संरक्षण: एक सप्ताह में चार चूजों का जन्म

जैसलमेर जिले के सम क्षेत्र के गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में एक सप्ताह के भीतर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण के चार चूजों का जन्म हुआ है।

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जैसलमेर जिले के सम क्षेत्र के गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में एक सप्ताह के भीतर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण के चार चूजों का जन्म हुआ है। ये चूजे चार मादा गोडावण—टोनी, रीवा, अमन और शार्की के अंडों से निकले हैं। वन विभाग के अनुसार फरवरी-मार्च में दिए गए अंडों को वैज्ञानिक विधि से कृत्रिम रूप से सेजा गया। गत 28 मार्च को टोनी के अंडे से पहला चूजा निकला, जबकि बाकी तीन चूजे 2 अप्रेल को जन्मे। इससे पूर्व 9 मार्च को भी मादा रीवा ने एक चूजे को जन्म दिया था। सभी नवजातों को विशेष निगरानी में रखा गया है। अब सुदासरी और रामदेवरा स्थित दोनों ब्रीडिंग सेंटरों में गोडावण की कुल संख्या 50 हो गई है। इसमें सम के सेंटर में 22 और रामदेवरा में 28 गोडावण हैं। डीएनपी के डीएफओ बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि एक सप्ताह में चार चूजों का जन्म संरक्षण कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

अब 178 गोडावण, 128 खुले क्षेत्र में

गौरतलब है कि जिले में वर्तमान में कुल 178 गोडावण हैं, जिनमें से 128 खुले क्षेत्र में रह रहे हैं। गोडावण राजस्थान का राज्य पक्षी है और यह सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल हो चुका है। हाइटेंशन बिजली लाइनें और मानवीय गतिविधियां इनके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई हैं। लेकिन डेजर्ट नेशनल पार्क क्षेत्र में बनाए गए 70 से अधिक क्लोजर और हैचरी केंद्रों ने इनके लिए सुरक्षित माहौल तैयार किया है।