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हीटवेव का ‘हेल्थ बिल’ भारी, इलाज के खर्च से डगमगा रहा घरेलू बजट

रेगिस्तान की तपिश अब सीधे लोगों की जेब पर असर डालने लगी है। जिले में लगातार बढ़ते तापमान के बीच डिहाइड्रेशन, हीट एक्सहॉशन, उल्टी, चक्कर और कमजोरी जैसे मामलों में तेजी आई है।

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रेगिस्तान की तपिश अब सीधे लोगों की जेब पर असर डालने लगी है। जिले में लगातार बढ़ते तापमान के बीच डिहाइड्रेशन, हीट एक्सहॉशन, उल्टी, चक्कर और कमजोरी जैसे मामलों में तेजी आई है। अस्पतालों में मरीज बढऩे के साथ मेडिकल खर्च भी अचानक ऊपर पहुंच गया है। भीषण गर्मी के कारण सबसे ज्यादा दबाव निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ बिजली, पानी और ठंडे पेय पर खर्च बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ दवाइयों, जांच और निजी अस्पतालों के बिल ने घरेलू बजट का संतुलन बिगाड़ दिया है। गर्मी में बीमार होने पर केवल दवा का खर्च नहीं बढ़ रहा, बल्कि पूरा 'हीट हेल्थ पैकेज' परिवारों पर भारी पड़ रहा है।

गर्मी का बढ़ता आर्थिक असर

-तापमान 45 डिग्री के आसपास लगातार दर्ज

-ओआरएस और इलेक्ट्रोलाइट बिक्री में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

-निजी अस्पतालों में डिहाइड्रेशन मरीज लगभग दुगुने

-सामान्य मरीज पर 1500 से 5000 रुपए तक खर्च

-बिजली खपत में 20 से 25 प्रतिशत तक उछाल

-सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच अस्पतालों में सबसे ज्यादा दबाव

गर्मी बढ़ी, अस्पतालों में लंबी कतारें

राजकीय जवाहर चिकित्सालय सहित निजी क्लीनिकों में इन दिनों डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीज तेजी से पहुंच रहे हैं। कई मरीजों को सलाइन और ऑब्जर्वेशन में रखना पड़ रहा है। मेडिकल स्टोर संचालकों के अनुसार पिछले दिनों में ग्लूकोज, ओआरएस, विटामिन और बुखार की दवाइयों की मांग अचानक बढ़ी है। बच्चों और बुजुर्गों के मरीजों की संख्या अधिक बताई जा रही है। कई परिवारों को अन्य जरूरी खर्च रोककर इलाज कराना पड़ रहा है।

एक मरीज पर बढ़ता खर्च

डॉक्टर फीस - 200 से 300 रुपए

बॉडी जांच -500 से 2000 रुपए

सलाइन और इंजेक्शन - 1000 रुपए तक

निजी भर्ती - 3000 रुपए से अधिक

दवाइयां और फॉलोअप - अलग खर्च

मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

खुले में काम करने वाले मजदूर, रिक्शा चालक, ऑटो चालक और निर्माण कार्य से जुड़े लोग सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। तेज धूप के कारण शरीर में पानी की कमी तेजी से हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कई मरीज बेहोशी, कमजोरी और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

घर का पूरा बजट बिगड़ा

इस बार गर्मी ने घर का पूरा बजट बिगाड़ दिया। बच्चों की तबीयत खराब होने पर निजी अस्पताल जाना पड़ा। डॉक्टर फीस, जांच और दवाइयों में अचानक काफी पैसा खर्च हो गया। ऊपर से दिनभर कूलर चलाने से बिजली बिल भी बढ़ गया। अब महीने के बाकी खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। पहले ऐसी स्थिति कभी महसूस नहीं हुई थी।

-सीमा देवी, गृहिणी

बीमारी के कारण मजदूरी भी बंद

तेज धूप में काम करते समय अचानक शरीर जवाब दे गया। अस्पताल में सलाइन लगानी पड़ी और डॉक्टर ने आराम करने को कहा। बीमारी के कारण मजदूरी भी बंद हो गई। एक तरफ कमाई रुकी, दूसरी तरफ दवाइयों और जांच का खर्च बढ़ गया। गर्मी अब सिर्फ मौसम नहीं रही, गरीब आदमी के लिए आर्थिक मुसीबत बन गई है।

-हनुमानराम, दिहाड़ी मजदूर

अब बचत लगभग खत्म होने लगी

पूरा दिन सडक़ पर रहने से शरीर में लगातार कमजोरी महसूस हो रही है। डॉक्टर ने ज्यादा पानी और इलेक्ट्रोलाइट लेने की सलाह दी। अब रोज ठंडे पेय, पानी और दवाइयों पर अलग खर्च करना पड़ रहा है। पहले जितनी कमाई होती थी, उसमें घर आसानी से चल जाता था, लेकिन अब बचत लगभग खत्म होने लगी है।

-रईस खान, ऑटो चालक

उम्र बढऩे के साथ ज्यादा परेशान कर रही गर्मी

उम्र बढऩे के साथ गर्मी ज्यादा परेशान कर रही है। ब्लड प्रेशर और घबराहट की शिकायत बढ़ गई है। बार-बार अस्पताल जाना पड़ रहा है। दवा, जांच और आने-जाने में लगातार पैसा खर्च हो रहा है। रात में बिजली कटौती होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। इस बार गर्मी ने सेहत के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ा दिया है।

-गीता कंवर, बुजुर्ग महिला

एक्सपर्ट व्यू: अर्थ व्यवस्था व कार्य दक्षता पर असर

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. नेहा पुरोहित का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी के कारण शरीर में पानी और नमक की कमी तेजी से हो रही है। लोग शुरुआती लक्षण को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। हीटवेव अब केवल मौसम की समस्या नहीं रही। इसका असर सीधे परिवारों की अर्थव्यवस्था और कार्यक्षमता पर पड़ रहा है। मजदूर और निम्न आय वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।