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मोदी की टीम में शामिल होते ही कैलाश चौधरी के सामने सरहदी जिले से आ गई ये बड़ी चुनौती

मंत्री बनते ही अब कैलाश चौधरी के सामने सरहदी जिले की सबसे बड़ी चुनौती, कैसे निपटेंगे?

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Jaisalmer water crisis- big challenge for minister Kailash Choudhary

Jaisalmer water crisis- big challenge for minister Kailash Choudhary

जयपुर/ जैसलमेर। बाड़मेर जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से ( Barmer Jaisalmer Lok Sabha constituency ) निर्वाचित सांसद कैलाश चौधरी ( kailash choudhary ) को प्रधानमंत्री मोदी की टीम (Modi Cabinet ) में राज्यमंत्री का दर्जा मिल गया है, लेकिन अब उनके सामने अपने क्षेत्र की चुनौतियां हैं। इनमें सबसे बड़ी चुनौती पेयजल की है। फिलहाल औसत बारिश कम होने तथा बार-बार पडऩे वाले अकाल को देखते हुए केन्द्र सरकार की नेशनल रेनफेड एरिया अथोरिटी (राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण) ने राजस्थान के जैसलमेर जिले को सूखाग्रस्त जिलों में ( drought hit cities ) शामिल किया है। इसके अलावा प्रदेश के नागौर, अजमेर व चूरू जिले भी सूखाग्रस्त जिलों की लिस्ट में हैं। ऐसे में राज्यमंत्री के सामने अपने संसदीय क्षेत्र के जैसलमेर जिले से जलसंकट ( water crisis in jaisalmer ) को दूर करना एक बहुत बड़ी चुनौती रहेगी।

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अलग से बजट नहीं, विभिन्न योजनाओं से चलाएंगे काम
खास बात तो ये है कि सूखाग्रस्त घोषित होने के बावजूद इन जिलों के लिए अलग से कोई बजट नहीं है। केन्द्र सरकार के एनआरएए की ओर से चिह्नित किए गए चारों जिलों में आगामी पांच साल तक एक्शन प्लान के तहत ही विभिन्न कार्य किए जाएंगे।यानी केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का बजट ही इस प्रोजेक्ट में विशेष कार्य योजना के तहत खर्च किया जाएगा। इसके लिए एनआरएए के अधिकारियों ने मोटा-मोटा खाका तैयार कर लिया है।


जैसलमेर सरहदी जिले के लिहाज से महत्वपूर्ण
उल्लेखनीय है कि जैसलमेर सरहदी जिला है। इस लिहाज से ये काफी महत्वपूर्ण है और यहां जलसंकट को दूर करना एक बड़ी चुनौती रहेगा। गौरतलब है कि इस रेतीले जिले के मतदाता अपने तत्कालीन सांसद कर्नल सोनाराम से काफी नाराज थे, क्योंकि उनके कार्यकाल में पानी की समस्या से लोगों को निजात नहीं मिली थी। इसको देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था और कैलाश चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया था। अब चौधरी चुनाव जीत गए हैं और मंत्री भी बना दिए गए हैं। बड़ी बात ये कि जैसलमेर के लोग आज भी जलापूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं। किसानों को समय पर पानी की आपूर्ति की जरूरत है। यह यहां सबसे बड़ा मुद्दा है। ऐसे में कैलाश चौधरी के सामने फिलहाल ये सबसे बड़ी चुनौती बन कर उभर रही है।

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जिले के जलापूर्ति व्यवस्था पर एक नजर
जैसलमेर के सांकड़ा ग्राम पंचायत नेड़ान के प्रभुराम मेघवालों की ढाणी में पेयजल संकट की स्थिति बनी हुई है। जिससे ग्रामीण व मवेशी पेयजल के लिए भटकने को मजबूर हो रहे हैं। ढाणी में पेयजल सुविधा के नाम पर मात्र एक हेण्डपंप लगा हुआ है। गत तीन माह से यह हेण्डपंप खराब पड़ा है। जिसके चलते ग्रामीणों को ट्रैक्टर टंकियों से पानी खरीदकर मंगवाना पड़ रहा है, तो पशु पानी की तलाश में जंगलों में दम तोड़ रहे हैं।

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इसी तरह रामदेवरा ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण गर्मी के साथ ही पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न होने लगी है। क्षेत्र के सूजासर गांव में गत कई महीनों से जीएलआर सूखे पड़े हैं। गांव सहित आसपास क्षेत्र में 300 घरों की बस्ती निवास करती है। यहां पेयजल सुविधा को लेकर जीएलआरों का निर्माण करवाया गया है। इन जीएलआरों में गत कई महीनों से जलापूर्ति बंद होने के कारण ग्रामीणों को ट्रैक्टर टंकियों से पानी खरीदकर मंगवाना पड़ रहा है। इसके अलावा मवेशी पेयजल के लिए इधर उधर भटक रहे हैं।

ये कुछ उदाहरण हैं, जो भीषण गर्मी में सरहदी जैसलमेर जिले के बाशिंदों को पानी पिलाने के दावों की पोल खोल रहे हैं, लेकिन पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों की पीड़ा कोई नहीं सुन रहा। हालात यह हैं कि जिले के अधिकतर गांवों में पेयजल समस्याओं से निजात के लिए लाखों रुपए खर्च कर जीएलआर बनाई गई है, लेकिन फिर भी वहां पेयजल संकट से आमजन को मुक्ति नहीं मिल रही है। जिससे भीषण गर्मी के साथ पेयजल संकट से ग्रामीण जूझने को मजबूर हैं।

जीत के बाद ये बोले कैलाश चौधरी
सांसद बनने के बाद मीडिया से बातचीत में कैलाश चौधरी ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि बाड़मेर-जैसलमेर में नौजवानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता रहेगा। नहरी पानी को सीमावर्ती जिलों में लाने, रेल सेवा का विस्तार करना भी उनकी प्राथमिकता में शामिल है। पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसको बतौर कार्यकर्ता निभाऊंगा। रिफाइनरी (barmer refinery Rajasthan ) के कार्य को कांग्रेस ने लटकाया, उसे जल्द शुरू करवाने को लेकर प्रयास करेंगे।

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