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काला कनक करेगा रोगों को ठीक!

- लोहारकी में हो रही औषधीय गुणों से भरपूर काले गेहूं की खेती

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काला कनक करेगा रोगों को ठीक!

काला कनक करेगा रोगों को ठीक!

पोकरण. आम तौर पर बुआई किए जाने वाले सामान्य गेहूं के साथ अब क्षेत्र में कृषि में नवाचार के रूप में औषधीय गुणों से भरपूर माने जाने वाले काले गेहूं की खेती भी की जाने लगी है। कृषि विभाग की सलाह के अनुसार किसानों की ओर से इन्दिरा गांधी नहर के मोहनगढ़ व नाचना क्षेत्र में काले गेहूं की खेती किए जाने के बाद अब पोकरण क्षेत्र के नलकूपों पर भी काले गेहूं की खेती की जा रही है। इस वर्ष कृषि विभाग की प्रेरणा से प्रायोगिक तौर पर लोहारकी के किसान सार्दुलसिंह रावलोत की ओर से भी काले गेहूं की खेती की गई। जिससे उसे आमतौर पर होने वाले गेहूं से डेढ़ गुणा गेहूं का उत्पादन हुआ है। काले गेहूं के भाव भी बाजार में सामान्य गेहूं से ज्यादा है।
औषधीय गुणों से भरपूर है काला गेहूं
कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी महेन्द्रसिंह यादव व कृषि पर्यवेक्षक मदनसिंह चंपावत ने बताया कि काला गेहूं की उपयोगिता औषधी के रूप में ज्यादा मानी जाती है। यह गेहूं ऊपर से काले रंग का दिखाई देता है, लेकिन उसके अंदर आटा सामान्य गेहूं की तरह सफेद ही होता है। कृषि वैज्ञानिकों की ओर से किए गए शोध के अनुसार काले गेहूं में विशेष रूप से औषधीय गुण पाए जाते है। यह शरीर में डायबिटीज को कम करने व ह्रदय रोगियों के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
पीपीएम होता है अधिक
उन्होंने बताया कि साधारण गेहूं में एंथोसायनिन मात्र पांच पीपीएम होता है। जबकि काले गेहूं में यह 100 से 200 पीपीएम होता है। इसके अलावा जिंक व आयरन की मात्रा भी 60-70 प्रतिशत अधिक होती है। काले रंग की वजह एंथोसायनिन है। फलों, सब्जियों व अनाज में रंग उनमें मौजूद प्लांट पिग्मेंट की मात्रा पर निर्भर करता है।
शक्तिवर्धक एंजाइम्स करता है पैदा
उन्होंने बताया कि काला गेहूं मधुमेह रोगियों में पाचन शक्ति बढ़ाने के साथ ही शक्तिवर्धक एंजाइम्स पैदा करता है। एंटीऑक्सीडेंट व पौष्टिकता भी भरपूर मात्रा में होती है। जिससे कैंसर, मानसिक तनाव, अनिद्रा, घुटनों का दर्द व एनीमिया में भी सहायक है।
मित्र से मिली जानकारी
लोहारकी में काले गेहूं की खेती करने वाले किसान सार्दुलसिंह रावलोत ने बताया कि काले गेहूं के उत्पादन व उसके गुणों के बारे में अजमेर निवासी एक मित्र से जानकारी मिली। उसके बाद उन्होंने कृषि विभाग बीकानेर के वैज्ञानिकों से भी संपर्क कर बुआई के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की। यह गेहूं सामान्य गेहूं से 15-20 दिन पूर्व बुआई किया जाता है तथा सामान्य गेहूं से 10 दिन बाद इसकी कटाई होती है। औषधीय गुण होने के कारण बाजार में इसकी कीमत भी 10 हजार रुपए क्विंटल तक मिल जाती है। इसका बीज भी दिल्ली, पंजाब या हरियाणा में महंगे भावों में मिलता है। इस वर्ष कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर काले गेहूं की खेती की है।