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एक्सीडेंट प्रोन एरिया में हादसों को टालने के लिए नहीं हो रहे उपाय

-जिले में सालाना सौ लोग सडक़ों पर खो रहे जिंदगी

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jaisalmer news

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जैसलमेर . हत्या में किसी की जान जाती है तो सडक़ हादसों में भी। हत्या के मामलों को लेकर जिम्मेदार जितने चिंतित नजर आते हैं, उसका दसवां हिस्सा भी सडक़ हादसों की रोकथाम में लगाएं तो हालात में तब्दीली आ सकती है।अपराध के लिहाज से अब भी राजस्थान के अन्य जिलों की तुलना में षांत जैसलमेर जिले में साल-दर-साल औसतन एक सौ या उससे ज्यादा लोग सडक़ हादसों में दम तोड़ते हैं जबकि हत्या के मामले यहां साल में एक दर्जन भी नहीं होते।जिले के ग्रामीण क्ष् ोत्रों के अलावा जैसलमेर मुख्यालय तथा इसके आसपास की कई सडक़ें हादसों के लिए कुख्यात हो चुकी हैं।इसके बावजूद उन्हें सुरक्ष् िात बनाने के लिए जिम्मेदार प्रयास करते दिखाईनहीं दे रहे।

थम नहीं रहा मौतों का सिलसिला
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में आए दिन होने वाले सडक़ हादसों में लोग बड़ी संख्या में न केवल घायल होते हैं बल्कि हर चौथे दिन से भी कम समय एक जना दम तोड़देता है।2015 में जहां 99 लोगों की जान दुर्घटनाओं की भेंट चढ़ गई।उसके अगले साल यह आंकड़ा 107, 2017 में 106 तक पहुंच गया।चालू साल के पहले 6 महीनों में 45 जनों की मौत सडक़ हादसों में हुई। पुलिस प्रषासन इसे अपनी उपलब्धि मान रहा है।तुलनात्मक रूप से यह पिछले साल की तुलना में कम अवष्य है, लेकिन अब भी इस दिषा में कई काम किए जाने बाकी हैं।वहीं हत्या के मामलों की बात की जाए तो 2015 में 11, 2016 में 8 और 2017 में 10 जनों की जान इस अपराध में गई।

ये रास्ते हैं खतरनाक
जिले के कई ग्रामीण क्ष् ोत्रों में आए सडक़ मार्ग और राजमार्ग के इलाके हादसों के लिहाज से लगातार संवेदनषील बने हुए हैं।इनमें पोकरण उपखंडक्ष् ोत्र से लगता जोधपुर जिले का डेडिया गांव, पोकरण में लवां के पास, पोकरण से 7 किलोमीटर की दूरी पर पेट्रोल पम्प के पास, पोकरण-फलोदी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11, षरणायत फांटा, बीएसएफ के पास, जैसलमेर मार्ग पर रेलवे फाटक, सांकड़ा मार्ग, केलावा के पास आदि जगहों पर आए दिन सडक़ हादसे मूर्तरूप लेते रहे हैं।

यहां भी समस्याएं कम नहीं
सडक़ हादसे केवल पोकरण उपखंड ही नहीं बल्कि जैसलमेर जिला मुख्यालय में तथा इसके आसपास भी बहुतायत में होते रहे हैं। जैसलमेर की चूंगीनाका चौराहा से यूनियन चौराहा जाने वाली सडक़ पर आए दिन हादसे घटित होते हैं।इसके बावजूद वहां डिवाइडर बनाने की तरफ जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।ऐसे ही टूरिस्ट बंगलो से इंडोर स्टेडियम तक के मार्ग में रात्रिकालीन प्रकाष व्यवस्था माकूल नहीं होने और गौरव पथ बनाने के बावजूद वहां डिवाइडर निर्माण नहीं करवाए जाने से कई जने विगत समय में जान गंवा चुके हैं। जैसलमेर से लगते बड़ाबाग मार्ग और ट्रांसपोर्ट चौराहा व उससे आगे के बाइपास तथा जेठवाई रोड पर चलने वाले भारी पत्थरों से भरे ट्रक कई घरों के चिराग बुझा चुके हैं। जैसलमेर से सम जाने वाले रास्ते में तीन-चार बड़े घुमावों तथा उतार-चढ़ान को अब तक दुरुस्त नहीं करवाया गया है। जिससे प्रतिवर्ष पर्यटकों के साथ अन्य लोगों के वाहन हादसाग्रस्त होते रहे हैं।