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सांठ-गांठ के खेल में चल रहा गड़बड़झाला,फर्जी श्रमिक कार्ड बनाकर छात्रवृत्ति पाने का चल रहा खेल

सरकारी योजनाओं का किस तरह दुरुपयोग होता है, इसका उदाहरण निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना छात्रवृत्ति को प्राप्त करने के लिए चल रहे सांठ-गांठ के खेल व हो रहे गड़बड़झाले में देखने को मिल रहा है। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई कि संबंधित विद्यालय में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दिलाने के लिए गलत तथ्यों व साक्ष्यों को प्रमाण के तौर पर पेश किया जा रहा है। योजना में राशि अधिक होने के करण सर्वाधिक आवेदन इसी योजना को लेकर प्राप्त हो रहे हैं।

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Misuse of government schemes by get scholarship make fake labor card

सांठ-गांठ के खेल में चल रहा गड़बड़झाला,फर्जी श्रमिक कार्ड बनाकर छात्रवृत्ति पाने का चल रहा खेल

जैसलमेर.सरकारी योजनाओं का किस तरह दुरुपयोग होता है, इसका उदाहरण निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना छात्रवृत्ति को प्राप्त करने के लिए चल रहे सांठ-गांठ के खेल व हो रहे गड़बड़झाले में देखने को मिल रहा है। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई कि संबंधित विद्यालय में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दिलाने के लिए गलत तथ्यों व साक्ष्यों को प्रमाण के तौर पर पेश किया जा रहा है। योजना में राशि अधिक होने के करण सर्वाधिक आवेदन इसी योजना को लेकर प्राप्त हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना में निर्माण श्रमिक जीवन व भविष्य सुरक्षा योजना, निर्माण श्रमिक सुलभ्य योजना प्रसूति सहायता योजना और श्रम विभाग निर्माण श्रमिक औजार सहायता योजना का भी संचालन हो रहा है, लेकिन रुझान निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना छात्रवृत्ति को लेकर ही है। उधर, ऑनलाइन आवेदन के दौरान संबंधित संस्था प्रधान की भूमिका केवल यह प्रमाणित करने की रहती है कि संबंधित छात्र या छात्रा हिताधिकारी के पुत्र, पुत्री या पत्नी है या नहीं और वह संबंधित मान्यता प्राप्त विद्यालय या महाविद्यालय में नियमित अध्ययनरत है कि नहीं। ऐसे में सांठ-गांठ के खेल में यह गड़बड़झाला बिना किसी अड़चन के चल रहा है। लाखों रुपए योजना के नाम पर हड़पने का खेल लंबे समय से बदस्तूर जारी है। पत्रिका पड़ताल के पास एक दर्जन से अधिक आवेदन मौजूद हैं, जिनमें गलत तथ्य और फर्जी ठेकेदार फर्मों के प्रमाण पत्र दर्शाए गए हैं। गृहणी भी बच्चों को छात्रवृत्ति दिलाने के लिए श्रमिक बन गई है।
केस वन- 1
अब्दुला (बदला हुआ नाम) सरकारी स्कूल में कक्षा १२ मेें पढ़ रहा है। उसकी माता ने हिताधिकारी के तौर पर घोषणा की है कि वह एक फर्म जूनी मोहम्मद करीम कंस्टक्शन कंपनी (बदला हुआ नाम) में १९२ दिन श्रमिक के तौर पर कार्य कर चुकी है। पड़ताल में यह बात सामने आई कि महिला गृहणी है। फोन करने पर यह जानकारी सामने आई कि नियोजक महिला को जानता ही नहीं था।

केस -2
लाभू देवी (बदला हुआ नाम) ने हिताधिकारी के तौर पर घोषणा पत्र पेश किया था और श्रमिक होने के साक्ष्य के तौर पर यशोवद्र्धन कंस्ट्रक्शन (बदला हुआ नाम) का प्रमाण पत्र पेश किया था। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई कि ऐसी कोई फर्म थी ही नहीं।

फैक्ट फाइल-
-30 सितम्बर निर्धारित की गई है छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि
-200 के करीब विद्यालयों के विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति के लिए कर रहे आवेदन
-15 हजार के करीब विद्यार्थी आवेदन करेंगे छात्रवृत्ति के लिए इस सत्र में

ऐसा भी होता है....
हकीकत यह भी है कि निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना के लिए मान्यता प्राप्त विद्यालय व महाविद्यालय में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को 8 हजार से 25 हजार रुपए तक छात्रवृत्ति दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन हकीकत यह है कि पात्रता नहीं होने के बावजूद कुछ ई-मित्र संचालक नियोजक के प्रमाण पत्र बना रहे हैं। पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि इस गड़बड़झाले के लिए वे कुल राशि का एक बड़ा हिस्सा भी ले रहे हैं।

छात्रवृत्ति में राशि का प्रावधान

1. कक्षा 6 से 8 तक - 8000 रु.
-छात्रा व विशेष योग्यजन - 9000 रु.
2. कक्षा 9 -12 -9000 रु.
-छात्रा व विशेष योग्यजन - 10000 रु.
3. आइटीआइ - 9000 रु.
-छात्रा व विशेष योग्यजन - 10000 रु.
4. डिप्लोमा छात्र -10000 रु
-छात्रा व विशेष योग्यजन - 11000 रु.
5. स्नातक (सामान्य) 13000 रु.
- छात्रा व विशेष योग्यजन - 15000 रु.
6. स्नातक (प्रॉफेशनल)- 18000 रु.
- छात्रा व विशेष योग्यजन - 20000 रु.
7. स्नातकोत्तर (सामान्य) - 15000 रु.
- छात्रा व विशेष योग्यजन - 17000 रु.
8. स्नातकोत्तर (प्रॉफेश्नल) - 23000 रु.
- छात्रा व विशेष योग्यजन - 25 000 रु.

इन साक्ष्यों के आधार पर मिल रही छात्रवृत्ति
-उत्तीर्ण की गई परीक्षा की अंकतालिका की प्रति
-शिक्षण संस्था के प्रधान का प्रमाण पत्र
-हिताधिकारी पंजीयन पत्र या कार्ड की प्रतिलिपि
-भामाशाह कार्ड या भामाशाह नामांकन की प्रति
-आधार कार्ड की प्रति
-बैंक खाता पास बुक के पहले पृष्ठ की प्रति

करते हैं सत्यापन
विभागीय स्तर पर हम सत्यापन करते हैं। हकदार व्यक्ति को ही लाभ मिले, यही हमारा प्रयास है। इस संबंध में शिकायत मिलती है तो हम अवश्यक कार्रवाई करेंगे।
-मनोज चौधरी, श्रम कल्याण अधिकारी, जैसलमेर