2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

JAISALMER NEWS- सुल्ताना क्षेत्र में रात को भडक़ा दावानल, सुबह बुझाया तो दोपहर में फिर भभका

सुल्ताना क्षेत्र में बार बार लग रही आग, सेना के डांवर केम्प के पास अग्निकांड

2 min read
Google source verification
Jaisalmer patrika

Patrika news

मोहनगढ़ (जैसलमेर). क्षेत्र में इन दिनों वन विभाग की वन पट्टी में आग लगने की घटनाएं दिनो दिन बढ़ती जा रही है, जिसकी चपेट में आने से हजारों पेड़ पौधे अब तक जलकर स्वाह हो चुके हैं। गत महीने बड्डा क्षेत्र में पेड़ पौधों में दो बार आग लग गई थी। इस वजह से पूरा गांव खतरे में आ गया था। आग पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। शनिवार शाम को एसएमजी नहर की 105 आरडी के पास नहर किनारे पेड़ पौधों में आग लगने से कई पेड़ पौधे जलकर राख हो गए। नहर किनारे आग लगने के कारण पास ही आई सेना के डांवर केम्प के आयुध डिपो पर खतरा मंडराने लगा था। देर रात्रि तक पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन मौके पर मौजूद रहा। जैसलमेर से दमकल आने के बाद मशक्कत से आग पर काबू पाया गया। रविवार दोपहर को फिर से इसी क्षेत्र में सेना के डांवर केम्प के पास आग भडक़ गई। तेज आंधी के चलने के कारण आग ने विकराल रूप धारण करते हुए सैकड़ों पेड़-पौधों को चपेट में ले लिया। सेना के जवान आग बुझाने में जुटे रहे। तेज आंधी के कारण आग पर काबू पाने में मशक्कत करनी पड़ी। सूचना मिलने पर उपखण्ड अधिकारी जैसलमेर हंसमुख कुमार, नाचना वृताधिकारी विनोद कुमार सीपा, मोहनगढ़ पुलिस थानाधिकारी महेन्द्र सिंह खींची, नेहड़ाई पुलिस चौकी प्रभारी दीप सिंह, कांस्टेबल खीमा राम सहित अन्य भी मौके पर पहुंचे। शाम तक आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था।

IMAGE CREDIT: patrika

चिंतित है पशुपालक
-जंगलों में भभकने वाली आग के कारण बड़ी मात्रा में चारा नष्ट होने की आशंका बन जाती है। ऐसे में पशुपालकों को पशुओं के आहार को लेकर इन दिनों परेशानियां बढ़ रही है। प्राकृतिक चारागाहों में पूर्व में हुए अग्निकांडों ने वन क्षेत्र व चारागाहों को लील लिया है।

भडक़ रहा दावानल
-अधिकांश मामलों में भीषण गर्मी में कभी तेज हवा तो कभी घर्षण से आग विकराल रूप ले लेती है।
-चारागाहों या वन क्षेत्रों में उगी हुई घास सघनता के कारण मामूली चिंगारी से ही भभक जाती है और दावानल तबाही कर जाता है।
-संदेह यह भी जताया जाता है कि समाज कंटक कुदरती रूप से उगे घास व चारागाह को जलाने के प्रयास में ऐसे दावानलों को भडक़ात हैं।