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हमारी विरासत…. सिद्धू कल्ला से जुड़ा शिलालेख मिला जैसलमेर में

हाल ही में राजस्थान के नवगठित जिले फलोदी के ऐतिहासिक अस्तित्व से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शिलालेख जैसलमेर जिले के देवीकोट क्षेत्र में मिला है।

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हाल ही में राजस्थान के नवगठित जिले फलोदी के ऐतिहासिक अस्तित्व से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शिलालेख जैसलमेर जिले के देवीकोट क्षेत्र में मिला है। यह शिलालेख विक्रम संवत 1501 यानी 1444-45 ई. का है और इसमें फलोदी नगर के संस्थापक माने जाने वाले सिद्धू कल्ला, उनके पिता हरपाल तथा पुत्रों जेणा व खेतो के नाम स्पष्ट रूप से अंकित हैं। यह खोज इतिहास शोधार्थी दिलीप कुमार सैनी और इतिहासकार पार्थ जगाणी ने की है।
शोधार्थी दिलीप सैनी वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दामोदरा में इतिहास व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं और राजस्थान विश्वविद्यालय से प्रोफेसर तमेघ पंवार के निर्देशन में शोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि देवीकोट और उसके आसपास के शिलालेखों का पुरातात्विक अध्ययन करते समय आशापुरा देवी ओरण में एक गोवर्धन स्तम्भ पर यह शिलालेख मिला। शिलालेख में उल्लिखित नामों और स्थानों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट हुआ कि सिद्धू कल्ला का संबंध पुराने आसणीकोट गांव से था। विक्रम संवत 1515 में 140 बैलगाडिय़ों के साथ आसणीकोट से पलायन कर फलोदी की स्थापना करने वाले यही ऐतिहासिक पुरुष थे।
अब तक सिद्धू कल्ला के अस्तित्व को केवल साहित्यिक स्रोतों — जैसे 17वीं शताब्दी में लिखित च्मुह्रोत नेणसी री विगतज् — से ही जाना जाता था। उनकी माने तो यह पहली बार है जब उनका नाम किसी पुरातात्विक साक्ष्य में मिला है। शोधकर्ताओं के अनुसार सिद्धू कल्ला का जैसलमेर रियासत के तत्कालीन शासक से आत्मसम्मान की रक्षा को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्होंने अपने कुटुंब व समर्थकों सहित जैसलमेर सीमा से बाहर जाकर फलोदी की नींव रखी थी।