
सरहदी जिले के प्रवेश द्वार परमाणु नगरी पोकरण में स्वच्छ भारत के दावों की पोल खुल रही है। फलसूंड रोड पर हाई-वे के पास कचरे के ढेर लगे है। कस्बे से एकत्रित कचरे को यहीं खुले में डाला जा रहा है। जिनके निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यहां गंदगी फैल रही है। गौरतलब है कि कस्बे में नगरपालिका की ओर से प्रतिदिन सफाई की व्यवस्था की जाती है। यहां दो-तीन ट्रैक्टरों के साथ 8-9 टैक्सियां लगाई गई है। अनुमान के अनुसार कस्बे से प्रतिदिन 7 टन कचरा एकत्रित किया जाता है। सफाई के लिए करीब 30 स्थायी और 50 से अधिक अस्थायी कर्मचारी लगाए गए है। जिससे पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो रही है। ऐसे में यहां व्यवस्था चरमराई हुई है।
परमाणु नगरी पोकरण की आबादी 30 हजार से अधिक है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में होटलें, रेस्टोरेंट्स, मिष्ठान की दुकानें और फास्ट फूड की दुकानें स्थित है। जैसलमेर जाने वाले पर्यटक और रामदेवरा जाने वाले श्रद्धालु आवाजाही पोकरण होकर करते है। इसके साथ ही आसपास ग्रामीण क्षेत्र से भी प्रतिदिन सैकड़ों लोग पोकरण आते है। ऐसे में जनसंख्या और लोगों की संख्या को देखते हुए सफाई कर्मचारियों की संख्या और कचरा परिवहन के संसाधनों की व्यवस्था नाकाफी है।
नगरपालिका सूत्रों के अनुसार 2018 में 19 लाख रुपए की लागत से कचरे के निस्तारण के लिए मशीन की खरीद की गई थी। जिसे डम्पिंग यार्ड बनाकर उसमें स्थापित की जानी थी। जिससे कचरे का निस्तारण किया जा सके। यह मशीन 8 वर्षों बाद भी फलसूंड रोड के पास स्थित अग्निशमन केन्द्र भवन परिसर में बेकार पड़ी है। जिसे आज तक चालू नहीं किया गया है। इसी प्रकार डम्पिंग यार्ड भी नहीं बनाया गया है। ऐसे में कचरे फलसूंड रोड और जोधपुर-जैसलमेर रोड के बीच खाली जगह में खुले में ही डाला जा रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कस्बे की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए कार्य किया जा रहा है। कर्मचारियों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। मशीन में तकनीकी खराबी थी। जिसे ठीक करवाकर चालू करवाया जाएगा।
- झब्बरसिंह चौहान, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका, पोकरण
Published on:
08 Apr 2026 07:59 pm
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