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फीका पड़ा पोकरण का नमक उद्योग, सरकारी उपेक्षा से ठप हुआ व्यापार

पश्चिमी राजस्थान की परमाणु नगरी पोकरण का वर्षों पुराना नमक उद्योग आज भी पुन: जीवित होने के इंतजार में है।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 12 Nov 2025, 9:26 PM IST

पश्चिमी राजस्थान की परमाणु नगरी पोकरण का वर्षों पुराना नमक उद्योग आज भी पुन: जीवित होने के इंतजार में है। कभी इस उद्योग से कस्बे और आसपास के सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी चलती थी, लेकिन सरकारी उपेक्षा, नीतिगत अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अब यह क्षेत्र वीरान होता जा रहा है। बीते तीन दशकों में आधे से अधिक नमक उत्पादन इकाइयां बंद हो चुकी है। रिण क्षेत्र में 40 इकाइयों को नमक उत्पादन के लिए भूखंड आवंटित किए गए थे। इकाइयों में सैकड़ों कुएं खुदवाकर खारे पानी से नमक तैयार किया जाता था। सूर्य की तपिश से सूखकर यह नमक देशभर की मंडियों तक पहुंचता था, लेकिन करीब 30 वर्ष पूर्व रेल मंत्रालय की ओर से खुदरा लदान योजना बंद कर देने से व्यापार की रीढ़ टूट गई। पहले यही नमक मालगाडिय़ों से बिहार, बंगाल, दिल्ली और पंजाब तक भेजा जाता था, जिससे व्यापारियों और मजदूरों दोनों को स्थायी आय मिलती थी। नमक उद्योग बंद होने से 500 मजदूर उत्पादन क्षेत्र में और लगभग 200 मजदूर नमक फैक्ट्रियों में बेरोजगार हो गए। कस्बे में चल रही एक दर्जन नमक पिसाई फैक्ट्रियां अब वर्षों से बंद है। श्रमिकों का पलायन बढ़ा है और कई मजदूर मजबूरी में अन्य कामों की ओर मुड़ गए है।

लाखों हुए थे खर्च, अब सुविधाएं जमींदोज

पूर्व में उद्योग विभाग ने यहां विकास के लिए लाखों रुपए खर्च कर सडक़, पुलिया, मीठे पानी की पाइपलाइन, जीएलआर और पशु खेळियां बनवाई थी, लेकिन अब यह सभी सुविधाएं जमींदोज हो चुकी हैं। सडक़ें टूट चुकी हैं, पुलिया ढह चुकी है और पाइपलाइनें सड़ गई हैं। जिससे सरकार की ओर से खर्च की गई राशि पर पानी फिर गया है। स्थानीय नमक उत्पादक सुरेश जोशी का कहना है कि यदि सरकार की ओर से खुदरा लदान पुन: शुरू किया जाए और उद्योग क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज मिले, तो यह व्यवसाय फिर से लोगों को रोजगार देने की क्षमता रखता है। कभी पोकरण का नमक देश की रसोई में स्वाद घोलता था, आज वही नमक उद्योग सरकारी उदासीनता और सुविधाओं के अभाव में फीका पड़ गया है। यहां के श्रमिक और उत्पादक अब भी इस उद्योग के पुनर्जीवन की आस में हैं।