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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: अधूरे वादे, उखड़ी सड़कें

प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को सडक़ से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 25 साल बाद भी नाचना क्षेत्र की कई ढाणियां अब भी सडक़ सुविधा से वंचित हैं।

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प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को सडक़ से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 25 साल बाद भी नाचना क्षेत्र की कई ढाणियां अब भी सडक़ सुविधा से वंचित हैं। टूटी-फूटी सडक़ों और अधूरे वादों के बीच ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिम्मेदार भले ही यह दावा करे कि दूर-दराज के गांवों को सडक़ मार्ग से जोड़ा गया है, लेकिन नाचना से मंगलनगर होते हुए अवाय गांव तक जाने वाली सडक़ की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जगह-जगह सडक़ें उखड़ी हुई हैं, और गहरे गड्ढों ने आवागमन को मुश्किल बना दिया है। नाचना कृषि मंडी से भदड़ीया की ओर जाने वाली सडक़ भी जर्जर हालत में है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है।

बदहाल सडक़ों से ग्रामीणों का बढ़ता दर्द

गांवों को जोडऩे वाली संपर्क सडक़ों की मरम्मत न होने के कारण ग्रामीणों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। टूटी सडक़ों पर वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रशासन की अनदेखी के कारण लोग मजबूर हैं और विकास के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों की आवाज-'सडक़ें हमारी जरूरत

ग्रामीणों का कहना है कि टूटी सडक़ों की वजह से न सिर्फ आम यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि खेती-किसानी और व्यापार पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीण
भंवरलाल, ग्रामीण का कहना है कि नाचना से मंगलनगर होते हुए अवाय गांव जाने वाली सडक़ बदहाल है। गहरे गड्ढों के कारण सफर जोखिम भरा हो गया है। इसी तरह ग्रामीण नरपतसिंह देवड़ा ने बताया कि कृषि मंडी से भदड़ीया जाने वाली सडक़ की हालत बेहद खराब है। प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।